खास गुण वाले खाद्य पदार्थ

Bahut se khad padarth vishes gun wale hote hain, inka dainik jiwan men jaroor prayog karana chahiye. Inka prayog se sharer ke bahut rog apne aap thik ho jate hai.


खास गुण वाले खाद्य पदार्थ


परिचय-

ये खाद्य पदार्थ विशेष गुण वाले होते हैं। इनका दैनिक जीवन में जरूर प्रयोग करना चाहिए।

तुलसी-

तुलसी धार्मिक रूप में ही नहीं बल्कि दवा के रूप में भी बहुत महत्वपूर्ण है। तुलसी की महक हवा के साथ दूर-दूर तक जहां भी जाती है वहां का वातावरण शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक हो जाता है। यह हानिकारक कीटाणुओं मच्छर-मक्खी आदि की बढ़ोत्तरी को भी रोकती है।

तुलसी की मुख्य दो किस्में होती हैं-

  • `श्याम तुलसी´ (काली डालियों और काले रंग की पत्तियों वाली)।
  • `राम तुलसी´ (सफेद डालियों और हरे रंग की पत्तियों वाली)।

सभी प्रकार की तुलसी महक और गुण में लगभग बराबर होती हैं। फिर भी `राम तुलसी´ के मुकाबले `श्याम तुलसी´ अधिक गुण वाली होती है।

जो व्यक्ति रोजाना सुबह तुलसी की पांच पत्तियां खाता है वह कई प्रकार के रोगों से सुरक्षित हो जाता है। यह दिमाग की कमजोरी दूर करती है, याद्दाश्त को मजबूत करती है। नियमित रूप से तुलसी का सेवन करने वाले वृद्ध व्यक्ति कमजोरी का अनुभव नहीं करते और संक्रमण के रोगों से दूर रहते हैं।

तुलसी के पत्ते खून को साफ करते हैं, इनको खाने से सुन्दरता में बढ़ोत्तरी होती है।

रोगों को दूर करने की दृष्टि से तुलसी असाधारण औषधि है। यह तो अमृत है, क्योंकि आज मनुष्य जितने रोगों से ग्रस्त है उन सभी रोगों को तुलसी के द्वारा आसानी से दूर किया जा सकता है। आयुर्वेद में तुलसी को त्रिदोषनाशक कहा गया है।

तुलसी का रस-

रोजाना खाली पेट तुलसी के रस को पानी में मिलाकर पिया जाये तो याद्दाश्त तेज हो जाती है। इससे पाचनशक्ति बढ़ती है। यह कीड़ों को मारता है। उल्टी होने पर तुलसी का रस पीने से उल्टी रुक जाती है। मलेरिया रोग में तुलसी बहुत ही लाभदायक होती है। तुलसी गुर्दे के काम करने की शक्ति को बढ़ाती है। यह अम्लता, पेचिश, सफेद दाग, मोटापा आदि में बहुत लाभदायक है। बुखार, खांसी, नजला, जुकाम एवं दमा में 3 मिलीलीटर तुलसी का रस रोगी को देने से लाभ होता है। पथरी के रोगी को तुलसी के रस के साथ शहद मिलाकर 6 महीने देने से काफी लाभ होगा। तुलसी का रस खून के कोलेस्ट्राल को कम करता है।

आंवला-

आंवला में फल और औषधि दोनों के गुण उपस्थित होते हैं। आयुर्वेंद में इसका बहुत ही महत्व है। खाने में आंवला कड़वा, मधुर, एवं शीतल है। यह अपने कड़वेपन के कारण कफ एवं गैस को खत्म करता है और मधुरता व शीतलता के कारण पित्तनाशक है अत: यह त्रिदोषनाशक है।

  • आंवले के अन्दर विटामिन `सी´ भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसकी खास बात यह है कि इसके विटामिन गर्म करने और सुखाने से भी खत्म नहीं होते।
  • आंवला युवकों को जवान बनाए रखता है और बूढ़ों को युवाशक्ति प्रदान करता है। इसी का प्रयोग करके `च्वयन´ ऋषि ने दुबारा अपने यौवन को प्राप्त किया था। आंवले में जितने रोगों से लड़ने की शक्ति, खून को साफ और बल-वीर्य बढ़ाने वाले तत्व हैं। उतने संसार की किसी वस्तु या औषधि में नहीं हैं। इसलिए स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए अपने भोजन में आंवले को मुख्य रूप से शामिल करें।
  • आंवला हमारे दांतों और मसूढ़ों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है एवं तन-मन को फुर्तीला बनाता है। नर्वस सिस्टम (स्नायु रोग), हृदय की बेचैनी, धड़कन, मोटापा, जिगर, ब्लडप्रेशर, दाद, प्रदर, गर्भाशय दुर्बलता, नपुसंकता, चर्म रोग, मूत्ररोग एवं हडिड्यों आदि के रोगों में आंवला बहुत उपयोगी होता है। जिगर की दुर्बलता, पीलिया को खत्म करने में आंवला को शहद के साथ मिलाकर खाने से लाभ मिलता है और यह टॉनिक का काम करता है।
  • आंवला को रस के रूप में, चटनी के रूप में या इसके चूर्ण को पानी के साथ ले सकते हैं।

त्रिफला-

एक भाग हरड़, दो भाग बहेड़ा और चौथा भाग आंवले का मिश्रण होता है त्रिफला। यह सामान्य आहार भी है और औषधि भी है। इसमें सभी रस होते (कड़वा, खट्टा, तीखा, मीठा व नमकीन) हैं।

  • त्रिफला रोगों से छुटकारा दिलाता है व जीवनी शक्ति को बढ़ाता है इससे पेट साफ होता है और गहरी नीन्द आती है। सुबह ताजे पानी के साथ एक चम्मच त्रिफला का सेवन करना बहुत ही गुणकारी होता है।
  • त्रिफला का सेवन करने से पुरुषों की जननेन्द्रियों के रोग, स्त्रियों के मासिकधर्म सम्बंधी रोग, योनि में से सफेद पानी आना (श्वेतप्रदर) आदि दूर होते हैं।

बारह साल तक त्रिफला का सेवन करने से लाभ-

  • पहले वर्ष तक सेवन करने से आलस्य से छुटकारा।
  • दो वर्ष तक सेवन से सभी रोग दूर हो जाते हैं।
  • तीसरे साल तक इसका सेवन करने से आंखों की ज्योति बढ़ती है।
  • चार साल तक सेवन करने से शरीर की सुन्दरता बढ़ती है।
  • पांच वर्ष तक सेवन करने से बुद्धि का विकास होता है।
  • छ: वर्ष तक सेवन करने से शरीर शक्तिशाली हो जाता है।
  • सात वर्ष सेवन करने से बाल काले हो जाते हैं।
  • आठ वर्ष तक सेवन करने से बुढ़ापे को जवानी में बदल देता है।
  • नवें साल तक इसका सेवन करने से आंखों को विशेष शक्ति मिलती है।
  • दस वर्ष तक सेवन करने से आवाज में सुधार होता है।
  • ग्यारह वर्ष तक सेवन करने से वाक् सिद्धि।

जानकारी-

वाक् सिद्धि के लिए अष्टांग योग का होना बहुत ही जरूरी है।

नीम-

नीम का पेड़ बहुत ही उपयोगी है। इसकी जड़ से लेकर टहनी, फूल-पत्ती और फल तक सभी औषधीय गुणों से भरपूर हैं। यह सभी के लिए कल्प वृक्ष के समान है। नीम की कड़वाहट ही उसका सबसे बड़ा गुण है। गर्मी के समय सभी पेड़ों के पत्ते झड़ जाते हैं। लेकिन नीम हरा भरा रहता है।

लाभकारी-

  • नीम आमतौर पर कीटाणुओं को खत्म करने वाला होता है। प्रतिदिन नीम की पांच कोमल पत्तियां चबाकर खाने से सभी रोग दूर हो जाते हैं, खून शुद्ध हो जाता है और संक्रामक रोगों से बचा जा सकता है। इसके अलावा दांतों से जुड़े सारे रोग खत्म हो जाते हैं और आवाज सुरीली हो जाती है।
  • नीम की दातून करने से दांत साफ, मजबूत एवं चमकदार और रोग मुक्त हो जाते हैं। नीम की पत्तियों को पीस कर फोड़े-फुन्सियों पर लगाने से पूरा आराम और लाभ मिलता है।
  • नीम की पत्तियों को सुखाकर जलाने पर उसके धुंए से मक्खी, मच्छर भाग जाते हैं।
  • नीम की पत्तियों को उबालकर उस पानी से नहाने और आहार-विहार संतुलित रखने से त्वचा से जुड़े सारे रोग खुजली, अकौता एवं सोरायसिस आदि में लाभ मिलता है।
  • नीम के तेल को कई औषधियों में प्रयोग करते हैं। आयुर्वेद में नीम वात-पित्त-कफ-तीनों रोगों को दूर करने वाला है।  पित्ती (एलर्जी), त्वचा रोगों एवं डायबिटीज में नीम के पत्तों का रस पीने से बहुत फायदा होता है।
  • नीम के तेल की दो बूंद नाक में डालने से बालों को झड़ने और सफेद होने से रोका जा सकता है। रूसी से छुटकारा पाने के लिए रात को सोते समय बालों में नीम के तेल की मालिश करें।

नारियल-

भारतीय संस्कृति में नारियल को शुद्ध फल माना जाता है और हिन्दुओं के हर उत्सव व शुभ कामों में यह प्रयोग किया जाता है। वेद व अन्य धार्मिक ग्रन्थों में कई जगह नारियल के महत्व के बारे में बताया गया है।

लाभकारी-

  • नारियल खाने व औषधि दोनों में प्रयोग किया जाता है। इसमें विटामिन `ए´, `बी´, `सी´, और कैल्शियम, लोहा, फास्फोरस आदि खनिज तत्व पूरी मात्रा में पाये जाते हैं। इसमें अच्छी क्वालिटी के क्षारीय तेल भी पाये जाते हैं। जिससे शरीर को पर्याप्त चिकनाई मिलती है। इसमें पाया जाने वाला प्रोटीन उच्चकोटि का होता है और इसके कार्बोंहाइड्रेट बहुत अधिक विकास करने वाले होते हैं।
  • नरियल के बीज ठंडे, जल्दी पचने वाले, पौष्टिकता से भरपूर, शक्तिदायक, खून को साफ करने वाले, मूत्र को साफ करने वाले, पित्त व खून के रोगों को दूर करने वाले होते हैं। इसके सूखे बीज सुगन्ध, रुचिकर, शक्ति प्रदान करने वाले होते हैं।
  • प्रतिदिन नारियल खाने से मुंह में किसी प्रकार का कैंसर नहीं होता है। गर्भवती महिला को नारियल के बीज खिलाने से बच्चा स्वस्थ और हष्ट-पुष्ट पैदा होता है और बच्चा पैदा होते समय दर्द भी कम होता है। नर्म नारियल के पानी में अधिक गुण होते हैं तथा यह बच्चों के लिए काफी लाभदायक और स्वास्थ्यवर्धक होता है।
  • नारियल का दूध पीने से अल्सर, कब्ज, कोलाईटिस और कमजोरी जैसे रोग दूर हो जाते हैं। कमजोर पाचनतंत्र के लिए यह बहुत ही लाभदायक है।

नारियल पानी-

प्राकृतिक रूप से नारियल का पानी स्टरलाइज्ड एवं मिनरल वाटर है। हमारे अन्दर दवा के जहरीले असर को नारियल का पानी नष्ट कर देता है। यह बहुत ही स्वादिष्ट होता है और पाचनक्रिया में मदद करता है। यह बच्चों के लिए बहुत ही लाभदायक होता है। यदि इसका सेवन शहद के साथ करें तो यह टॉनिक का काम करता है।

लाभकारी-

  • नारियल का पानी हैजे में बहुत ही लाभदायक होता है। यह हैजे के कीटाणुओं को आंतों से बाहर निकालता है। शरीर में पानी की कमी हो तो नारियल के पानी में नींबू मिलाकर पीने से काफी लाभ मिलता है।
  • नारियल के पानी में पूरी मात्रा में पोटेशियम एवं क्लोरीन होता है। यह गुर्दे के रोग, मूत्र की कमी, पथरी,गर्भ के समय विषाक्त, एल्ब्युमिन की अधिकता, खसरा, टायफायड जैसे रोगों में बहुत उपयोगी होता है।
  • किसी भी गर्भवती महिला या बच्चे को उल्टी, दस्त होने पर नारियल के पानी में नींबू का रस मिलाकर पिलाने से काफी फायदा होता है। इस जल में दूध मिलाकर पीने से कब्ज और अपचन की समस्या दूर हो जाती है।
  • नारियल का पानी सभी प्रकार के संक्रमण रोगों में लाभदायक होता है। यह दमा और अल्सर में बहुत ही उपयोगी है। प्रतिदिन नारियल के पानी से मुंह धोने से काले धब्बे, झाईयां, मुहांसे दूर हो जाते हैं और सुन्दरता बढ़ जाती है।

शहद-

मानव जीवन में शहद अमृत के समान होता है। जब शरीर की शक्ति बिल्कुल कम हो जाती है, आवाज भी नहीं निकलती है तब ऐसे समय में शहद का सेवन करने से शरीर में नये जीवन का संचार होता है। शहद पहले से पचा हुआ खाद्य है। इसलिए यह शरीर में पहुंचकर तुरंत शक्ति प्रदान करता है। इसीलिए शहद का सेवन जन्म से लेकर मृत्यु तक करते हैं। दूध के साथ शहद मिलाकर पिलाने से बच्चे स्वस्थ और रोग से मुक्त होते हैं। यह मनुष्य के शरीर को स्वस्थ, सुन्दर और बुद्धिमान बनाता है और बूढ़ों में नई ऊर्जा प्रदान करता है।

  • शहद के अन्दर विशेष प्रकार के रासायनिक तत्व पाये जाते हैं जो मनुष्य के लिए बहुत ही लाभदायक होते हैं। इसमें विटामिन `ए´, `बी´, `सी´, भारी मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा आवश्यक खनिज पदार्थ लोहा, तांबा, कैल्शियम, सोडियम फास्फोरस, आयोडीन भी पाए जाते हैं। शहद कीटाणु नाशक भी होता है।
  • प्रतिदिन शहद का सेवन करने से शरीर में शक्ति, स्फूर्ति, और ताजगी बनी रहती है और रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है। शहद सांस-तंत्रिका, दमा, जिगर तंत्र की कमजोरी, पाचन तंत्र और त्वचा से जुड़ी कई बीमारियों को दूर करता है। यह खून को साफ करता है, बलगम को बाहर निकालता है और पाचनशक्ति को बढ़ाता है।
  • शहद और नींबू का शर्बत पीने से थकान दूर होती है और कोलेस्ट्राल कम हो जाता है। शहद में मोटे और पतले होने अर्थात दोनों के गुण होते हैं।
  • शहद और पानी को मिलाकर खाली पेट पीना चाहिए। ज्यादा गर्म शहद पानी में मिलाकर पीने से नुकसानदायक होता है। सर्दियों के मौसम में शहद को गुनगुने पानी में मिलाकर पीना चाहिए। शहद को कभी गर्म न करें।

शुद्ध शहद की पहचान-

  • शुद्ध शहद कभी पानी में आसानी से नहीं घुलता है।
  • शुद्ध शहद में खुशबू होती है। यह ठंड में जम जाता है और गर्मी में पिघल जाता है।
  • शुद्ध शहद कपडे़ व कागज पर गिराने से इन पर धब्बा नहीं पड़ता है।
  • शुद्ध शहद में रूई की बत्ती भिगोकर जलाने पर जलती रहती है।
  • इसको देखने पर आर-पार दिखाई देता है।
  • कुत्ता इसे सूघंकर छोड़ देता है खाता नहीं है।
  • प्लेट में टपकाने से शुद्ध शहद सांप की कुण्डली जैसा गिरता है और अशुद्ध शहद प्लेट में गिरते ही फैल जाता है।