खाद्य-पदार्थों के मूल तत्व

Khadh padarthon ke mool tatw ko jane baiger aahar chikitsa ls upchar nahi karana chahiye kyonki kisi bhi chikitsa se thik prakar se laabh pane ke liye uske niyam aur mool tatw ko jaanana jaroori hota hai.


खाद्य-पदार्थों के मूल तत्व


कुछ सदी पहले विशेषज्ञों ने जांच की जिसके नतीजतन उन लोगों को उस मिट्टी के ढेले में निम्नलिखित मूल तत्वों का पता लगाया................. 
किसी बहुत बड़े विद्वान ने कहा था अगर हम मनुष्य के शरीर के अन्दर के कल-पुर्जों को एक अन्दर का सुलगता हुआ चालू इंजन मान लें तो उसके अन्दर विटामिनों को चिंगारियां समझना चाहिए................. 
कार्बोज को विनत्रजन, कार्बोदित और कार्बोहाइड्रेट आदि दूसरे नामों से भी जाना जाता है। यह कार्बन + ओषजन + उद्जन के मिलने से बनता है। यह 2 किस्म की होती है- शर्करा प्रधान और श्वेतासार (स्टार्च) प्रधान................. 
हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के मिलने से हमारे शरीर में रोजाना लगभग 300 मिलीलीटर पानी पैदा होता है। किसी भी व्यक्ति के पूरे शरीर में 70 प्रतिशत पानी होता है। ................ 
प्रत्यामिन नाम के तत्व को अंग्रेजी में `प्रोटीन´ कहा जाता है। यह एक ग्रीक शब्द से बना हुआ है जिसका मतलब होता है कि `सबसे पहले मै हूं´। यह प्रोटीन शरीर के लिए बहुत ही जरूरी तत्व होता है ................ 
हमारे प्राकृतिक खाने वाले पदार्थों साग-सब्जी, अन्न तथा फल आदि में काष्ठ निर्मित नसों का एक जाल सा बिछा हुआ होता है, जिसके आश्रय विटामिन आदि जरूरी पोषक तत्व उनमें स्थित होते हैं ................ 
खनिज लवणों को खून साफ करने वाला भोजन भी कहते हैं। इनमें कुछ खास तरह के उदि्भज लवण भी मिले हुए होते हैं- जैसे इमली में पाए जाने वाले, `लैक्टट और टाट्रेट लवण´, नींबू में पाया जाने वाला सिट्रेट लवण´................ 
कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के एक साथ मिलने से वसा (चिकनाई) वाले पदार्थ बनते हैं। इनमें कार्बन की मात्रा 79 प्रतिशत, हाइड्रोजन 11 प्रतिशत और ऑक्सीजन 10 प्रतिशत की मात्रा में होता है।................