कैन्सर, कर्कट रोग


कैन्सर, कर्कट रोग

(CANCER, CARINOMA)


अन्य महत्वपूर्ण रोगों का उपचार:

एल्कोहल

उरूस्तम्भ

बदन दर्द

बाला रोग (नारू)

बौनापन

चेहरे का लकवा

गर्दन का दर्द

अधिक गर्मी लगना

गीली खांसी

गिल्टी

हैजा (कालरा)

शरीर का सुन्न हो जाना

शरीर की जलन

सभी प्रकार के दर्द

शरीर के सभी रोगों से छुटकारा

शरीर को ताकतवर बनाना

टीके से उत्पन्न दोष

तृषा व दाह (प्यास और जलन)

हिचकी का रोग

हॉजकिन

च्छा-अनिच्छा

जलन

काली (कुकुर) खांसी

कमर दर्द

कमजोरी

कंठपेशियों का पक्षाघात

खांसी

कील कांटा चुभना

कुबड़ापन

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परिचय :

          कैंसर का अर्थ होता है, बिना किसी उद्देश्य के आकारहीन गांठ का हो जाना, जिसके बढ़ने को रोका न जा सके। शरीर में कोई गांठ होकर तेजी से बढ़ती रहे, एक जगह से काट देने पर दूसरी जगह फिर से हो जाना, यही कैंसर कहलाता है। इससे शरीर की परेशानी बढ़ती रहती है। इसमें गांठों का बढ़ना जारी रहता है। शुरुआत में इसका पता ही नहीं लगता है, किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं होता और जब रोग का पता लगता है तो रोग ऐसी अवस्था में पहुंच चुका होता है कि रोगी के प्राणों को बचाना कठिन होता है। इस बीमारी का नाम ही जानकर रोगी भयभीत हो जाता है। यदि कैंसर होने का पता शुरुआत में ही लग जाये तो रोगी को बचाया जा सकता है। जिन लोगों के भोजन में हरी सब्जी और ताजे फलों का उपयोग होता है, उनके छाती में प्रोस्टेट ग्लैण्ड के कैंसर कम होता है। विटमिन ´ए´, ´बी´, ´सी´, केरोटिन कैंसर का नियंत्रण करते हैं। प्राकृतिक रूप से विटमिन ´ए´ नहीं लेने से फेफडे़ का कैंसर और टी.बी. होने की सम्भावना अधिक रहती है। डिब्बों में बन्द रस में अनेक रासायनिक वस्तुएं मिली होती हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। ताजा रस ही अधिक लाभ करता है।

लक्षण :

  • कोई भी घाव जो जल्द भरे, विशेषकर मुंह में। त्वचा में घाव जो 6 सप्ताह बीतने पर भी नहीं भरे और घाव बढ़ता जाये।
  • लगातार रक्त (खून) का निकलना, विशेषकर औरतों में मासिक-धर्म रुकने के बाद, मल त्यागते समय कभी-कभी रक्त आना, जबकि बवासीर नहीं हो।
  • शरीर के किसी भी भाग में मांस का बढ़ना या फोड़ा, गांठ, मोटापा विशेषकर औरतों में।
  • लगातार खांसी और स्वरभंग, आवाज में भारीपन या गला बैठना।
  • कब्ज और दस्त का होना आंतों की स्वाभाविक प्रक्रिया में अन्तर।
  • तिल का रंग बदल जाना, मस्से, केलोइड गिल्टियों के रंग में अन्तर आना और दर्द होना।
  • बिना किसी वजह के वजन का बढ़ जाना, कमजोरी का होना, खाना-खाने का दिल न करना।
  • स्तन या शरीर के किसी भी हिस्से में गांठ का होना।
  • निप्पल से खून का बहना।
  • ऐसे फोडे़ का होना जो उपचार से ढीला न हो।
  • स्त्री जननांगों में गांठ, दर्द, खुजली, जलन और किसी भी प्रकार के छाले का होना।
  • वजन का कम होना, भूख कम लगना।
  • संभोग के बाद योनि में रक्त का आना।
  • मासिक-धर्म 50 वर्ष की आयु के लगभग बन्द होने के बाद फिर से खून का आना आदि कैंसर के लक्षण होते हैं।

भोजन तथा परहेज :

पथ्य :

          कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को नींबू के रस से बनी शिकंजी बनाकर पीने, फलों का रस, कच्ची और हरी सब्जियां, टमाटर, तरबूज, करेला, गाजर, शहद, अंगूर, केला, पालक, बन्दगोभी, किशमिश, सूखा मेवा, बादाम, आदि के प्रयोग से कैंसर होने की कम संभावना होती है।

अपथ्य :

  • नमक और वसा युक्त चीजों का प्रयोग न करें।
  • दूध, सूअर का मांस तथा नमक खानें में न दें।
  • अण्डा, मछली, पनीर, चाय, डालडा, एवं घी युक्त चीजें शराब दारू, और तम्बाकू से बनी चीजों का सेवन न करें।

विभिन्न चिकित्सा से उपचार-

1. लाल चीता (लाल चित्रक) : आधा से दो ग्राम लाल चीता सुबह-शाम सेवन करने से शरीर पर निखार आ जाता है और शरीर की मजबूती बढ़ती है।

2. तुलसी : तुलसी के 40 पत्ते पीसकर एक कप छाछ या दही की लस्सी बनाकर सुबह-शाम दो बार प्रतिदिन खिलाना चाहिए। नाश्ता आधे घंटे के बाद करना चाहिए। दूध और दही का अधिक सेवन करें। तेल, लालमिर्च का सेवन न करें। कैंसर दूर करने में यह लाभदायक होता है। स्वस्थ व्यक्ति भी लें तो निरोग रहेंगे। यह सभी प्रकार के रोगों में लाभदायक होता है।

3. फूल-गोभी : सुबह खाली पेट एक तिहाई पौन कप गोभी का रस रोजाना पीने से कैंसर, ग्रहणी, घाव, और कोलाइटिस, आदि रोगों में लाभ होता है।

4. पत्तागोभी : सुबह खाली पेट पत्तागोभी का कम से कम आधा कप रस रोजाना पीने से आरम्भिक अवस्था में कैंसर, बड़ी आंत का प्रवाह (बहना) ठीक हो जाता है।

5. कलौंजी :

  • आंतों का कैंसर, ब्लड कैंसर, गले का कैंसर जैसे अनेकों प्रकार के कैसरों से छुटकारा पाने के लिए एक गिलास अंगूर के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में तीन बार-सुबह बिना कुछ खाये, दोपहर में भोजन के बाद और रात में सोते समय पियें। एक किलो जौ में दो किलो गेहूं का आटा मिलाकर इसकी रोटी, दलिया बनाकर रोगी को देना चाहिए। इस प्रकार 40 दिनों तक चिकित्सा करें। खाने योग्य में आलू, अरबी और बैंगन का उपयोग न करें।
  • कलौंजी के बीजों में कैरोटीन होता है जिसे यकृत (लीवर) विटामिन में बदल देता है जिसकी क्रिया कैंसर को रोकती है। कैंसर रोगी हलवा बनाते समय कलौंजी के बीज डालकर हलवा बनाकर खायें।

6. पतंग (बक) : पतंग (बक) और बनफ्शा के काढे़ से मांसाबुर्द धोने से पीड़ा से दुर्गन्ध कम हो जाती है।

7. मशरूम : आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार मशरूम का सेवन करने से कैंसर रोग से सुरक्षा होती है, क्योंकि इसमें कैंसर विरोधी तत्व होते हैं।

8. चुकन्दर : चुकन्दर का रस कैंसरनाशक व शक्तिवर्द्धक माना जाता है। चुकन्दर के रस का सेवन करने से वजन में वृद्धि होती है।

9. दालचीनी :

  • दालचीनी कैंसर में अधिक दी जाती है। दालचीनी तेल 3 बूंद रोजाना 3 बार दें। साथ ही दालचीनी चबाते रहने का निर्देश दें। यदि घाव बाहर हो, तेल लगाना सम्भव हो तो दालचीनी का तेल लगाते भी रहें। यह प्रतिदूषक, व्रणशोधक, व्रणरोपक (घाव को भरने वाला) और रोगाणु नाशक भी है।
  • दालचीनी का काढ़ा रोजाना 350 मिलीलीटर पीने से कैंसर रोग से राहत मिलती है।
  • दो चम्मच शहद में एक चम्मच दालचीनी मिलाकर प्रतिदिन तीन बार चाटने से सभी प्रकार के कैंसर नष्ट हो जाते हैं।

10. हल्दी :

  • हल्दी एक अच्छा रक्ताशोधक है यह तो बहुत पहले ही साबित हो चुका है। इसके चूर्ण को सुबह-शाम महामंजिष्ठादि काढे़ के साथ दिया जाए तो जरूर शत-प्रतिशत लाभ होगा या होने की संभावना रहती है। धैर्य के साथ नियमित रूप से औषधि का सेवन करवायें।
  • लगभग 2-4 ग्राम की मात्रा में हल्दी का बारीक चूर्ण सुबह-शाम सेवन करने से कर्कट (कैंसर) की गांठे धीरे-धीरे घुल जाती हैं।

11. खुरासानी कुटकी : खुरासानी कुटकी के काढ़े से घाव धोते रहने से घाव की पीड़ा शान्त होती है।

12. बाहमी (बेंगसाग): बाहमी (बेंगसाग) का रस 1 से 2 चम्मच 5-10 ग्राम रोजाना सुबह-शाम दें। इसमें गांठ के घुलने और अर्न्तगलन नष्ट करने की क्षमता होती है। ध्यान रहें कि इसे निर्धारित मात्रा से ज्यादा न दें, नहीं तो चक्कर अवसाद जैसे दुर्लक्षण प्रकट हो सकते हैं। इसके पत्ते के रस के अभाव में पंचाग का काढ़ा का चूर्ण 2-5 ग्राम देना चाहिए।

13. मदार : मदार की जड़ की छाल आधा ग्राम पीसकर सुबह-शाम सेवन से कैंसर की बीमारी में लाभ होता है।

14. पंचाग : पंचाग का रस 10-20 मिलीलीटर सुबह-शाम, या इसका काढ़ा 20-40 ग्राम रोजाना 3-4 बार सेवन करने से कैंसर की बीमारी में लाभ होता है, इसके साथ-साथ ही अगर हल्दी का प्रयोग भी किया जाए तो जल्द ही आराम मिल जाता है।

15. अनन्नास : अनन्नास का रस 1 गिलास रोजाना सुबह-शाम प्रयोग करने से, शरीर के अन्दर के एक-एक अस्वस्थ तंतु स्वस्थ हो जाते हैं और शरीर हर तरह के रोगों से मुक्त हो जाता है।

16. अश्मभेदी :

  • अश्मभेदी का चूर्ण 8-12 ग्राम सुबह-शाम सेवन करने से कैंसर में लाभ होता है।
  • अश्मभेदी के फल का चूर्ण बनाकर रख लें। इसका महीन चूर्ण एक से दो ग्राम तक दिन में 3 बार मिश्री मिले दूध के साथ सेवन करायें और इसी के चूर्ण को दूध या पानी के साथ पीसकर या घिसकर अर्बुद (कर्कट) पर लगायें, तथा ऊपर से नागफनी थूहर का पत्ता गरम करके बांध दिया करें। इससे कैंसर के रोग में अधिक फायदा होता है।

17. फिटकरी : फिटकरी एक अच्छा रक्तशोधक माना गया है। इसलिए आधा ग्राम भस्म (राख) सुबह-शाम मिश्री के साथ या मिश्री मिले शर्बत के साथ रोग का सन्देह होते ही देना प्रारम्भ कर दें। सम्भवत: कुछ लाभ हो सकता है।

18. ताम्र सिंदूर :  आधा ग्राम ताम्र सिंदूर शहद, पान या तुलसी के पत्तों के रस से सुबह-शाम दें। इसके सेवन से आमाशय में उत्पन्न कैंसर, स्फोट और वात कफ प्रधान मांसाबुर्द में अच्छा प्रभाव देखा जाता है।

19. सदाबहार : सदाबहार फूल के पंचाग का काढ़ा 4-8 ग्राम नियमित सेवन से कैंसर के रोग में आराम मिलता है।

20. गुड़ : 2 चम्मच गुड़ का शीरा 1 कप पानी में मिलाकर दिन में 3 बार पिलायें। इसे तीन महीने (90 दिन) तक लगातार ऐसा करें। इससे कैंसर की बीमारी से आराम मिलता है।

21. अजवायन : 1 मिट्टी के बर्तन में 300 मिलीलीटर पानी भर लें। इसमें 12 ग्राम अजवायन, 12 ग्राम मोटी सौंफ, दो बादाम की गिरी रात को भिगो दें। सुबह पानी के साथ छानकर इनको पत्थर के सिलबट्टे पर पीसें। इनको पीसने में इन्हें भिगोकर छाना हुआ पानी ही काम में लें। फिर 21 पत्ते तुलसी के तोड़कर, धोकर इस पिसे पेस्ट में डालकर फिर से बारीक पीसें और छानकर रखे पानी में स्वाद के अनुसार मिश्री पीसकर घोलें। अन्त में पेस्ट मिलाकर कपड़े से छान लें और पीयें। यह सारा काम पीसकर, घोल बनाकर पीना, सब सूर्य उगने से पहले करें। सूर्य उगने के बाद बनाकर पीने से लाभ नहीं होगा। इसे करीब 21 दिनों तक सेवन करें। जब तक लाभ न हो, आगे भी पीते रहें। इससे हर प्रकार के कैंसर से लाभ होता है।

22. गाजर :

  • 1 गिलास गाजर के रस में 2 चम्मच मधु डालकर रोजाना सेवन करने से कैंसर के रोग में लाभ होता है।
  • गाजर का रस दूध में मिलाकर पीने से, मधुमेह, रक्त में लाल कणों की कमी, सिर दर्द, बुखार और कैन्सर रोगों से आराम मिलता है।
  • 310 मिलीलीटर गाजर का रस, 125 मिलीलीटर पालक के रस में मिलाकर तीन बार पीना चाहिए, गाजर का रस दूध में मिलाकर भी पी सकते हैं। इससे कैंसर के समस्त रोगों से छुटकारा मिलता है।
  • काली गाजर के रस के सेवन से, ब्लडकैंसर और पेट के कैंसर में लाभ होता है।
  • गाजर का रस पीने से कैंसर में लाभ होता है। गाजर पेट के कैंसर में बहुत अधिक लाभकारी होता है।
  • गाजर का रस पीने से कैंसर नष्ट हो जाता है। ल्यूकोमिया (ब्लड कैंसर) और पेट के कैंसर में यह अधिक लाभकारी होता है।

23. अनार : अनार दाना और इमली को रोजाना सेवन करते रहने से कैंसर के रोगी को आराम मिलता है और उसकी उम्र 10 वर्ष के लिए और बढ़ सकती है।

24. अंगूर : अंगूर का सेवन करें, 1 दिन में दो किलो से ज्यादा अंगूर न खायें। कुछ दिनों के बाद छाछ पी सकते हैं और कोई चीज खाने को न दें। इससे लाभ धीरे-धीरे महीनों में होगा। कभी-कभी अंगूर का रस लेने से पेट दर्द, मलद्वार पर जलन होती है। इससे न डरे। दर्द कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। दर्द होने के बाद इसे सेंक सकते हैं। इस प्रयोग से कैंसर की बीमारी में आराम मिलता है।

25. दही : दही के लगातार सेवन से कैंसर होने की संभावना नहीं रहती है।

26. गेहूं :

  • गेहूं के नये पौधों का रस रोजाना सुबह-शाम पीने से कैंसर रोग ठीक हो जाता है।
  • आधा कप गेहूं धोकर किसी बर्तन में दो कप ताजा पानी डालकर रख दें। 12 घंटे के बाद उस पानी को सुबह-शाम पीयें। लगातार 8-10 दिनों में ही रोग भागने लगेगा और 2-3 महीने के लगातार प्रयोग से कैंसर रोग से मरने वाला प्राणी रोग मुक्त हो जाएगा।
  • कैंसर भी शरीर की एक स्थिति मात्र है, जो यह बताती है कि अदभुत यंत्र में कोई खराबी है। प्रकृति हमेशा शरीर में संतुलन बनाए रखने का प्रयास करती है। कुछ लोग कैंसर से पीड़ित होते है और कुछ को अन्य बीमारियां। यह इसलिए कि सबके जीने का ढंग अलग-अलग होता है। एक महिला की छाती में कैंसर था वह सभी प्रकार की चिकित्सा कराकर निराश हो चुकी थी। उसको सभी प्रकार के रसों का आहार दिया गया तो वह कुछ ही महीनों में ठीक हो गई। इसी प्रकार एक ल्यूकीमिया के रोगी को पानी को एनिमा देकर पेट साफ किया गया और बाद में एनिमा से ही आंतों में गेहूं के पौधे का रस पहुंचाया गया और वह रोगी भी ठीक हो गया।

27. लहसुन : लहसुन के सेवन से पेट का कैंसर नहीं होता है। खाना-खाने के बाद 2 लहसुन को चबाकर 1 गिलास पानी के साथ पीयें। पेट कैंसर होने पर लहसुन को पानी में पीसकर कुछ दिनों तक पीयें। इससे लाभ होगा।

28. कचनार : कचनार की छाल के काढ़े को पीने से पेट के कैंसर से लाभ होता है।

29. कन्दर पेड़ : कन्दर के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर सेवन करने से पुराना घाव और पेट का कैंसर दूर होता है।

30. सदाबहार का पौधा : सदाबहार के पौधे के प्रयोग से तिल्ली, यकृत और ``कोरीयों कैर किनामा`` में होने वाला कैंसर ठीक किया जाता है।

31. तांबा : तांबे के लोटे में रात को पानी भरकर रख दें। सुबह इसी पानी को पीयें। इससे कैंसर में लाभ होगा।

32. डबलरोटी : डबलरोटी की मात्रा खाने में बढ़ा देने से पेट के कैंसर से बचाव होता है।

सावधानियां : ध्यान रखे सुपारी बराबर चबाते रहने से कैंसर होने की संभावना होती है। इसलिए इसके सेवन से बचें। 

 

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