केला


केला

(Banana)


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[ K ] से संबंधित आयुर्वेदिक औषधियां

भारत में केला हर जगह पाया जाता है और केले की सबसे अच्छी किस्में भारत में ही होती है। केले की कई किस्में होती है परिचय:

          भारत में केला हर जगह पाया जाता है और केले की सबसे अच्छी किस्में भारत में ही होती है। केले की कई किस्में होती है परन्तु इनमें माणिक्य, कदली, मत्र्य कदली, अमृत कदली, चम्पा कदली आदि मुख्य है। जंगलों में अपने आप उग आने वाले केले को वन कदली कहते हैं। असम, बंगाल और मुम्बई में केले की अनेक किस्में पाई जाती है। सुनहरे पीले व पतले छिलके वाले केले खाने में स्वादिष्ट होते हैं। लाल केला लम्बा व फीका होता है। मोटे छिलके वाले तिकोने केले की सब्जी बनाई जाती है।

          पके और कच्चे दोनों प्रकार के केले का उपयोग होता है। पके केले का छिलका निकालकर खाया जाता है और कच्चे केले की सब्जी बनाई जाती है। केले के फूल की भी सब्जी बनाई जाती है। केले की मिठास उसमें मौजूद ग्लूकोज तत्त्व पर आधारित है। ग्लूकोज शर्करा है। यह स्नायुओं का पोषण और शक्ति प्रदान करता है। केले में विभिन्न तत्त्व पाए जाते हैं। केला शरीर को मजबूत और बलवान बनाता है। केला एक ऐसा फल है जो हर मौसम में मिलता है। पका केला रक्तस्राव और प्रदर रोग में लाभकारी होता है।

         केले के फूल स्निग्ध, मीठा, कषैला, गुरू, ग्राही, कडुवा और हल्का गर्म होता है। यह अग्निप्रदीपक, वातनाशक, रक्तपित्त, कृमि, क्षय और कोढ़-नाशक होता है।

         केले में शरीर को बढ़ाने वाले तत्त्व (प्रोटीन और चर्बी) भी थोड़ी मात्रा में होती है और कमजोर व्यक्ति को दूध के संग केला खाना चाहिए।

विभिन्न रोगों में उपचार:

1. सूजन: समस्त प्रकार की सूजन में केला लाभकारी होता है।

2. चोट या रगड़ लगना: चोट या रगड़ लगने पर केले के छिलके को उस स्थान पर बांधने से सूजन नहीं बढ़ती। पका हुआ केला और गेहूं का आटा पानी में मिलाकर गर्म करके लेप करें।

3. गैस्ट्रिक अल्सर:

  • गैस्टिक अल्सर के रोग से पीड़ित रोगी को दूध और केला एक साथ खाना चाहिए।
  • केले को खाने से आंतों की सूजन, आमाशय का जख्म, जठरशोथ, कोलिटिस की सूजन और अतिसार आदि की बीमारियों में लाभ मिलता है।
  • केला और दूध को सेवन करने से पेट के अल्सर में लाभ मिलता है।

4. हृदय का दर्द: 2 केले 15 ग्राम शहद के साथ मिलाकर खाने से हृदय का दर्द ठीक होता है।

5. मिट्टी खाना: अगर बच्चे को मिट्टी खाने की आदत हो तो पका हुआ केला शहद में मिलाकर खिलाना चाहिए। इसके सेवन से मिट्टी खाने की आदत छूट जाती है।

6. दाद, खाज: केले के गूदे को नींबू के रस में पीस लें और दाद, खाज व खुजली में लगाएं। इससे दाद, खाज, खुजली दूर होती है।

7. पेट का दर्द: किसी भी प्रकार के पेट दर्द में केला खाना लाभकारी होता है। केला बच्चों और दुर्बल लोगों के लिएं पोषक आहार है। दस्त, पेट का दर्द और आमाशय व्रण में भोजन के रूप में केला खाना लाभकारी होता है।

8. दस्त:

  • 2 केला लगभग 100 ग्राम दही के साथ कुछ दिन तक खाने से दस्त व पेचिश को ठीक करता है।
  • केले के पेड़ के तने को पीसकर, 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में रस निकालकर पीने से दस्तों का बार-बार आना बंद होता है।
  • कच्चे केले को उबालकर रोटी बनाकर अरूआ के भरते के साथ खाने से पुराना अतिसार रोग ठीक होता है।
  • केले और थोड़ा सा केसर दही में मिलाकर खाने से लाभ मिलता हैं।

9. मुंह के छाले: जीभ पर छाले होने पर एक केला गाय के दही के साथ सुबह के समय सेवन करने से लाभ होता है।

10. आग से जल जाना: आग से जल जाने पर केले को पीसकर लगाना लाभकारी होता है।

11. नाक से खून आना: 1 गिलास दूध में चीनी मिलाकर 2 केले के साथ प्रतिदिन 10 दिनों तक खाने से नाक से खून आना बंद होता है।

12. पेशाब का रुक जाना:

  • केले के तने का रस 4 चम्मच और घी 2 चम्मच मिलाकर पीने से बंद हुआ पेशाब खुलकर आता है। इसके सेवन से पेशाब तुरंत आ जाता है।
  • केले की जड़ के बीच के भाग वाले गूदे को पीसकर पेट के नाभि के नीचे तक लेप करने से बंद पेशाब खुलकर आने लगता है।
  • एक पका केला खाकर आंवले के रस में चीनी मिलाकर पीने से पेशाब की रुकावट दूर होती है।
  • केले के तने का रस गाय के मूत्र में मिलाकर पीने से पेशाब खुलकर आता है।

13. पेशाब का बार-बार आना:

  • प्रतिदिन खाना खाने के बाद दो पके केले खाने से पेशाब का बार-बार आना बंद होता है।
  • पका केला और आंवले का रस मीठे दूध के साथ सेवन करने से मूत्र रोग ठीक होता है।
  • पका हुआ केला, अमलतास, विदारीकन्द तथा शतावर को पीसकर दूध के साथ खाने से पेशाब का बार-बार आना बंद होता है।
  • पका हुआ 2 केला, एक चम्मच आंवले का रस और 10 ग्राम मिश्री मिलाकर 4 से 5 दिनों तक पीने से बार-बार पेशाब आना रोग ठीक होता है।

14. उच्च रक्तचाप:

  • केले में पोटैशियम की अधिकता के कारण यह उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए विशेष लाभकारी होता है। केला खाने से उच्च रक्तचाप सामान्य बना रहता है।
  • प्रतिदिन एक पका केला खाली पेट खाने और ऊपर से इलायची के दो दाने चबाने से उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) सामान्य बनता है।

15. आन्त्रज्वर (टायफाइड): आन्त्रज्वर से पीड़ित रोगी को के लिए केला एक अच्छा भोजन है। इससे प्यास कम लगती है।

16. पित्त रोग: पका केला घी के साथ खाने से पित्त रोग मिटता है।

17. हिचकी:

  • जंगली कदली केले के पत्ते की राख 1 ग्राम को 10 ग्राम शहद में मिलाकर चाटने से हिचकी आनी बंद होती है।
  • 3 ग्राम केले की जड़ को पानी के साथ घिसकर उसमें चीनी या मिश्री मिलाकर सेवन करने से हिचकी नहीं आती है।

18. पेडू़: कदली के पेड़ के गर्भ का रस निकालकर पीने से पेडू में पहुंचे हुए जहर दूर हो जाते है।

19. जलन: केले और कमल के पत्तों पर सोने से शरीर की जलन शांत होती है।

20. पेचिश: केले को नींबू के साथ खाने से पेचिश रोग मिटता है और आहार शीघ्र ही पचता है। केले में दही मिलाकर खाने से पेचिश और दस्तों में लाभ होता है।

21. प्रदर: पके केले, आंवलों का रस और शर्करा इकट्ठा कर स्त्रियों को पिलाने से प्रदर और बहुमूत्र मिटता है।

22. कमजोरी: खाना खाने के बाद तीन महीने तक केला खाने से कमजोरी दूर होती है।

23. धातु (वीर्य) रोग: 1 पका केला 5 ग्राम घी के साथ सुबह-शाम 1 सप्ताह तक खाने से धातु के रोग खत्म होते है। अगर ठंडा लगे तो उसमें 4-5 शहद की बूंद मिला लें।

24. प्रमेह: कच्चे केले को सुखाकर चूर्ण बना लें 5 ग्राम के साथ रोज खाने से प्रमेह में बहुत लाभ होता है।

25. श्वास रोग (दमा):

  • कदली केले के पेड़ का केसरयुक्त हिस्सा कुतरकर उसमें रात के समय कालीमिर्च भर दें। सुबह के समय इसे घी में तलकर खाने से श्वास रोग जल्दी ठीक होता है।
  • श्वास रोग (दमा) में केले के तने का रस कालीमिर्च के साथ मिलाकर 20 से 40 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम देने से लाभ मिलता है।
  • 28 मिलीमीटर केले के पिण्ड के ताजा रस को 28 दूब के रस में मिलाकर 41 दिनों तक लगातार लेते रहने से भयंकर से भयंकर दमा भी ठीक होता है।
  • केले के तने का रस असाध्य रोग दमा को भी दूर करने में सहायक होता है। यह ध्यान रखें कि केले का रस जब दिया जाए तो खाने में केवल दूध, भात ही देना चाहिए।
  • दमे के रोगियों को केला कम खाना चाहिए। ध्यान रखना चाहिए कि केला खाने से दमा बढ़ता हुआ जाए तो केला नहीं खाना चाहिए।

26. काली खांसी: केले के सूखे पत्तों को जलाकर राख बना लें। इस राख को लगभग 6 मिलीग्राम शहद में मिलाकर रोगी को दिन में 3-4 बार देने से काली खांसी दूर होती है।

27. पुरानी खांसी: केला का शर्बत 2-2 चम्मच एक-एक घंटे के अंतर पर पीने से पुरानी खांसी में बहुत अधिक लाभ मिलता है।

28. खांसी:

  • क्षय रोग में खांसी का प्रकोप होने पर 20 ग्राम केले के तने का रस दूध में मिलाकर पीने से बहुत लाभ मिलता है। दिन में 3-4 बार पीने पर बलगम में खून आना भी बंद होता है।
  • केले का छिलका जलाकर उसकी राख बनाकर रख लें। आधे ग्राम की मात्रा में यह राख शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से पुरानी सूखी खांसी ठीक होती है।
  • केले के फूलों का रस निकालकर उसका 10 से 20 ग्राम शर्बत बनाकर उसमें मिश्री या चीनी मिलाकर सुबह-शाम पीने से खांसी में लाभ मिलता है।
  • केले के पत्तों की राख में नमक मिलाकर सेवन करने से खांसी का रोग दूर होता है।
  • 2-2 चम्मच केले का शर्बत हर 1-1 घंटे के बाद पीने से पुरानी खांसी समाप्त होती है।
  • केले के पत्तों को जलाकर उसकी राख को पीसकर शीशी में रख लें। इसमें से 2 चुटकी या आधा चम्मच राख सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करने से खांसी से आसानी से छुटकारा मिल जाता है।
  • कले के सूखे पत्तों को मिट्टी के बर्तन में रखकर आग पर गर्म करके राख बना लें। उस राख को पीसकर रख लें। लगभग आधा ग्राम राख को शहद के साथ मिलाकर चाटने से खांसी के रोग में आराम आता है।

29. गंजेपन : केले के गूदे को नींबू के रस के साथ पीसकर सिर पर लगाने से गंजेपन का रोग दूर है।

30. रतौंधी (रात में दिखाई न देना): केले के पत्तों का रस आंखों में लगाने से रतौंधी रोग समाप्त होता है।

31. अतिझुधा भस्मक रोग:

  • पका केला 50 ग्राम घी मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से भस्मक रोग मिटता है।
  • पके हुए केले पर्याप्त मात्रा में खाने से भस्मक रोग मिट जाता है।

32. वमन (उल्टी):

  • पका हुआ केला खाने से खून की उल्टी आनी बंद होती है।
  • 5 ग्राम केले के रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर पीने से लाभ मिलता है।

33. कब्ज (कोष्ठबद्वता):

  • केले का गूदा, केले का फूल, गूलर, कच्चू और ओल खाने से कब्ज़ मिटती है।
  • पका केला खाने से कब्ज दूर होती है।

34. खून की उल्टी: मुलायम केला खाने से खून की उल्टी दूर होती है।

35. मुंह के छाले: मुंह में छाले होने पर प्रतिदिन सुबह 2 केले दही के साथ खाएं। इससे छाले व जीभ के दाने ठीक होते हैं।

36. कान का बहना: केले के पत्तों का रस समुद्रफेन में मिलाकर कान में डालने से कान से मवाद बहना ठीक होता है।

37. मासिकधर्म सम्बंधी परेशानियां: केले के तने को कुचलकर उसका चार चम्मच रस निकालकर 7-8 दिनों तक खाली पेट लेने से रुका हुआ मासिकधर्म नियमित होता है।

38. कान की सूजन: लगभग 20 से 40 मिलीलीटर केले का रस सुबह-शाम पीने से कान की सूजन दूर होती है।

39. आंवरक्त (पेचिश):

  • पेचिश के रोगी को केले की रोटी बनाकर खाना खिलाना चाहिए। इसे दस्त में आंव व खून आना बंद होता है।
  • केले को मसलकर उसमें जीरा और नमक मिलाकर खाने से पेचिश का रोग ठीक होता है।
  • चने के सत्तू में पका हुआ केला मिलकर खाने से 2 से 3 दिनों में पेचिश का रोग ठीक होता है।
  • केला को दही में मिलाकर खाने से पेचिश के रोगी को रोग दूर होता है।

40. आहारनली की जलन: केला का रस 20 से 40 मिलीलीटर तक सुबह-शाम कालीमिर्च के साथ देने से लाभ होता है।

41. अग्निमांद्य: आधे पेट खाना खाने के बाद 3 पके केला खाने से पाचनशक्ति मजबूत होती है।

42. यकृत (जिगर) वृद्धि: एक कच्चा केला व पपीता दूध की 7-8 बूंद मिलाकर खाना खाने के बाद सेवन करने से यकृत (जिगर) का बढ़ना ठीक होता है।

43. घाव:

  • केले के छिलके को पीसकर घाव पर लगाने से घाव ठीक होता है।
  • केले के कोमल पत्ते को जख्म पर बांधने से आराम मिलता है।

44. प्रदर रोग:

  • पके केले पर छोटी इलायची को रखकर सेवन करने से प्रदर की बीमारी मिटती है।
  • पके केले को आंवले के रस में मिलाकर चीनी या मिश्री के साथ खाने से प्रदर रोग और बहुमूत्र (पेशाब का बार-बार आना) रोग में आराम मिलता है।
  • केले को शुद्ध देशी घी में भूनकर खाने से प्रदर रोग ठीक होता है।
  • खाना-खाने के बाद 2 केला खाकर ऊपर से एक गिलास शहद मिला गर्म दूध पीने से प्रदर रोग में फायदा होता है।
  • केले को दूध में खीर बनाकर खाने से श्वेत प्रदर रोग समाप्त होता है।
  • पका केला 10 ग्राम, 10 ग्राम विदारीकन्द और शतावर 10 ग्राम। पहले विदारीकन्द और शतावर को कूटकर चूर्ण बना लें और फिर इसमें पका केला मिलाकर 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम ताजे पानी के साथ सेवन करें। इससे प्रदर रोग में लाभ मिलता है।
  • 2 पके हुऐ केले को चीनी के साथ कुछ दिनों तक प्रतिदिन खाने से स्त्रियों को होने वाला प्रदर रोग में आराम मिलता है।
  • केले के पत्ते को पीसकर दूध में खीर बनाकर खाने से प्रदर रोग मिटता है।
  • केले के पत्ते और बांस के पत्ते पीसकर शहद में मिलाकर खाने से प्रदर में अधिक खून का जाना कम होता है।
  • पके केले को घी के साथ खाने से श्वेत प्रदर में फायदा होता है।
  • 20-40 मिलीलीटर केले के तने का रस सुबह-शाम सेवन करने से प्रदर रोग मिट जाता है।
  • पका केला, आंवले का रस और चीनी को एक साथ मिलाकर लेने से प्रदर और बहुमूत्र रोग ठीक होता है।
  • केले के कोमल पत्ते को बारीक पीसकर, दूध में डालकर खीर बनाकर खाने से प्रदर (रक्तस्राव) रोग ठीक होता है।

45. श्वेत प्रदर: 2 पके हुऐ केले को चीनी के साथ कुछ दिनों तक प्रतिदिन खाने से स्त्रियों को होने वाला प्रदर (ल्यूकोरिया) में आराम मिलता है।

46. आंतों का घाव:

  • केले में अम्ल कम होने के करण इसमें घाव को भरने की शक्ति होती है। प्रतिदिन 3 केला भोजन करने के बाद खाने से आंतों का घाव ठीक होता है।
  • केले का रस 20 से 40 ग्राम और कालीमिर्च मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से अमाशय की जलन व घाव समाप्त होती है।

47. जी मिचलाना, अम्लपित्त (खट्टी डकारें):

  • केले पर चीनी और इलायची डालकर खाने से खट्टी डकारें आनी बंद होती हैं।
  • केले के तने या फल का रस 20 से 40 मिलीलीटर को कालीमिर्च के साथ मिलाकर सुबह-शाम खाने से अम्लपित्त का रोग ठीक होता है।
  • यदि पेट से जलन शुरू होकर गले तक फैलता हो तो 2 केले चीनी व इलायची मिलाकर खाना चाहिए। इससे अम्लपित्त (खट्टी डकारें) का रोग ठीक होता है।

48. प्रसव का कष्ट:

  • केले की गांठ को गर्भवती स्त्री की कमर पर बांधने से प्रसव का कष्ट दूर होता है और बच्चे का जन्म आसानी से होता है। ध्यान रखे कि प्रसव और जेर (नाल, खेड़ी) के निकलते ही गांठ को खोलकर फेक दें।
  • केले के ऊपर कपूर का चूर्ण डालकर खाने से प्रसव में दर्द कम होता है।

49. कफ: कफ अधिक बनने पर केला और शहतूत खाना लाभदायक होता है।

50. प्यास अधिक लगना: गला सूखने व प्यास कम करने के लिए 2-2 केले प्रतिदिन 3 बार खाना चाहिए। इससे किसी भी कारण से अधिक प्यास का लगना बंद होता है।

51. जलोदर (पेट में पानी भरना): केले का रस 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में सेवन करने से लाभ होता है।

52. पित्त बढ़ने पर:  पित्त बढ़ने पर या पित्त से सम्बंधित बीमारी में केले के तने का रस 20 से 40 मिलीलीटर सुबह-शाम लेने से लाभ मिलता है।

53. रक्तप्रदर:

  • मासिकधर्म का अधिक आना या रक्तप्रदर होने पर केले के फूलों का 10 से 20 मिलीलीटर रस को दही में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से बहुत लाभ मिलता है।
  • 10 मिलीलीटर केले की जड़ का रस प्रतिदिन सेवन करने से रक्तप्रदर में आराम मिलता

54. मधुमेह के रोग:

  • कच्चे केले के टुकडे़ करके उसे सुखा लें और उसे कूटकर चूर्ण बनाकर बोतल में भर लें। यह चूर्ण 1 चम्मच फीके गाय के दूध के साथ सेवन करें। इससे मधुमेह में लाभ मिलता है।
  • यदि मधुमेह के रोगी को बार-बार पेशाब लगता हो तो उसके लिए केला खाना बहुत फायदेमंद होता है।

55. शीतपित्त: केले के तने का रस 20 से 40 मिलीलीटर सुबह-शाम पीने से शीतपित्त में लाभ होता है।

56. पित्त की पथरी:

  • कदली का रस और तिल का तेल 240-240 मिलीग्राम की मात्रा में शहद में मिलाकर प्रतिदिन 3 से 4 बार खाने से सभी प्रकार की पथरी खत्म होती है।
  • केले के तने के रस में थोड़ी-सी मिश्री मिलाकर पीने से कुछ दिनों में पथरी गलकर निकल जाती है।
  • केले के तने का रस 30 मिलीलीटर और कलमी शोरा 25 ग्राम को दूध में मिलाकर पीने से पथरी नष्ट होती है।

57. पेट का दर्द:

  • केले के रस में कालानमक मिलाकर खाने से पेट का दर्द तुरंत बंद हो जाता है।
  • केले को शहद के साथ दिन में 2 बार खाने से पेट का दर्द शांत होता है।

58. पेट के कीड़े: कच्चे केले की सब्जी प्रतिदिन 7 से 8 दिन तक सेवन करने से पेट के कीड़े मर जाते है।

59. रक्तपित्त:

  • केले के फूलों की सब्जी बनाकर खाने से रक्तपित्त में लाभ मिलता है।
  • केले के फलों का रस 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह-शाम खाने से रक्तपित्त ठीक होता है।

60. नाक से खून आना:

  • केले के तने का रस सूंघने से नकसीर फूटना (नाक से खून बहना) बंद होता है।
  • केले और दूध को लगातार 4-5 दिन तक खाने से नकसीर (नाक से खून बहना) ठीक होता है।

61. उपदंश: केले का रस 20 से 40 मिलीलीटर प्रतिदिन खाने से उपदंश में लाभ मिलता है।

62. चेहरे की झांई: एक केला लेकर उसका गूदा अच्छी तरह से मसलकर लसलसा बनाकर उसके अन्दर 2 चम्मच गुलाबजल, 2 बूंद खसखस का रस व 4 बूंद ग्लिसरीन की मिलाकर एक साफ शीशी में भरकर रख लें। अगर त्वचा सूख गई हो तो मेकअप करने से पहले चेहरे पर क्रीम की तरह इसे लगाएं और सूख जाने के बाद इसे गुनगुने पानी से धो लें। इस फेस पैक को 7 से 20 दिन तक बनाकर रखा जा सकता है।

63. चेचक: केले के बीजों का चूर्ण बनाकर शहद में मिलाकर पीने से चेचक का रोग जल्दी ठीक होता है और दूसरे लोगों को भी चेचक होने का डर नहीं रहता।

64. एक्जिमा (पामा): पके केले के गूदे में नींबू का रस मिलाकर त्वचा पर लगाने से दाद, खाज, खुजली और एक्जिमा ठीक होता है।

65. गुल्यवायु (हिस्टीरिया): लगभग 10 से 20 मिलीलीटर केले के फलों का रस सुबह-शाम सेवन करने से हिस्टीरिया रोग में मिर्गी के समान दौरे पड़ना ठीक होता है।

66. टी.बी:

  • केले के तने का रस निकालकर एक कप की मात्रा में प्रतिदिन सेवन करने से 40 दिनों में टी.बी. का रोग शांत होता है।
  • केले के तने का ताजा रस या कच्चा केला का प्रयोग करना टी.बी. रोग के लिए बेहद लाभकारी होता है।
  • क्षय (टी.बी.) रोग से पीड़ित रोगी में कष्टदायक खांसी, बलगम आना, रात को अधिक पसीना आना, तेज बुखार होना, दस्त रोग, भूख न लगना, वजन का कम होना आदि रोग भी हो तो रोगी को केले के मोटे तने के टुकड़े का रस निकालकर 1-2 कप रस हर दो घंटे घूंट-घूंट करके पीएं। इस तरह 2 महीने तक सेवन करने से टी.बी. का रोग ठीक होता है। केले का रस हर 24 घंटे के बाद ताजा ही निकालना चाहिए। 8-10 केले के पत्ते 200 मिलीलीटर पानी में डालकर पड़ा रहने दें। इस पानी को छानकर एक बड़ा चम्मच दिन में तीन बार पीना चाहिए इससे फेफड़ों में जमी गाढ़ी बलगम पतली होकर निकल जाती है। केले के पत्ते का रस मीठा में मिलाकर टी.बी. के रोगी को पिलाते रहने से भी उसके फेफड़ों के घाव भर जाते हैं। बलगम कम होता है और फेफड़ों के घाव भर जाते है। बलगम कम हो जाती है और फेफड़ों से खून आना रुक जाता है। केले के तने न हो तो केले के पत्तों का रस इसी प्रकार काम में ले सकते हैं।

67. पीलिया:

  • खाने वाला चूना एक ग्राम को एक केले में रखकर प्रतिदिन भूखे पेट खाने से कुछ दिनों ही पीलिया रोग ठीक होता है।
  • पका हुआ केला और शहद मिलाकर खाने से पीलिया रोग ठीक होता है।

68. मिर्गी (अपस्मार): 10 से 20 मिलीलीटर केले का जूस प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से मिर्गी रोग ठीक होता है।

69. फीलपांव (गजचर्म): केले के पेड़ का रस 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में सेवन करने से फीलपांव के रोगी को लाभ मिलता है।

70. सफेद दाग: केले के पत्ते को जलाकर बिल्कुल राख बना लें और इसमें थोड़ा सा मुर्दा शंख पीसकर मिला लें। इसे तिल्ली के तेल में मिलाकर सफेद दाग पर लगाने से दाग मिटता है।

71. बच्चों के रोग:

  • यदि बच्चे को मिट्टी खाने की आदत हो और उसने मिट्टी खा लिया हो तो उसे केले को शहद में मिलाकर खिलाना चाहिए। इससे बच्चों के पेट की मिट्टी निकल जाती है।
  • यदि बच्चा दूध न पीता हो तो उसे दूध की जगह पर दही, छाछ, लस्सी, दूध से बनी हुई चीजें जैसे खीर आदि दें। कुछ समय बाद बच्चा स्वंय दूध पीने लग जाएगा।

72. आग से जल जाने पर: पके हुए केले के गूदे को हाथ से मसलकर जले हुए भाग पर लगाने से आराम मिलता है।

73. दीर्घ जीवी या लम्बी उम्र: केला, दलिया, मीठे सेब, अंगूर, आम, मीठा पपीता, चीकू और चावल लगभग एक साल तक खाने से आयु बढ़ती है और शरीर भी हष्ट-पुष्ट रहता है।

74. सर्दी अधिक लगना: पके केले के बीच में चार बूंद शहद मिलाकर दिन में 2-3 बार लेने से अधिक ठंड महसूस होना समाप्त होता है।

75. शरीर की सूजन:

  • प्रतिदिन 3 पके केले खाने से शरीर की सूजन दूर होती है।
  • केले के तने का रस 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में कालीमिर्च के चूर्ण में मिलाकर सुबह-शाम लेने से शरीर की सूजन दूर होती है।

76. बच्चों के दांत निकलते समय का रोग: केले के फूलों से निकलने वाले बारीक तंतुओं को इकट्ठा करके रस निकाल लें और फिर उस रस में मिश्री और जीरा मिलाकर 4 से 6 ग्राम की मात्रा में दिन में एक बार बच्चे को खिलाने से बच्चों के दांत निकलते समय का सभी रोग समाप्त होता है। इसके रस को 15-20 बार मसूढ़ों पर लगाने से भी लाभ होता है।

77. शारीरिक शक्ति के लिए: दिन में खाना-खाने के बाद 2-3 पके केले प्रतिदिन नियमित रूप से खाने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है। इससे शरीर में मांस और चर्बी भी बढ़ती है। इसका प्रयोग लगातार 2 महीने तक करने से शरीर सुन्दर बनता है।

78. मोटा होना: केला स्वप्नदोष और प्रमेह में लाभदायक है। केला शरीर को मोटा करता है। 2 केला खाकर ऊपर से 250 मिलीलीटर दूध पीने से 3 महीने में ही मोटापा बढ़ता है।

79. पेट के सभी रोग: केला खाने से पेट से सम्बंधी सभी बीमारियों जैसे: जठरशोथ, वृहदान्त्रशोथ, आमाशय का जख्म, आंतों की सूजन आदि रोग दूर होते हैं।

80. गले के रोग:

  • यदि मछली आदि खाते समय उसका कांटा गले में अटक जाए तो उसे निकालने के लिए पका हुआ केला खाना चाहिए। केले की चिकनाई की वजह से गले में फंसा हुआ मछली का कांटा पेट में आ जाता है।
  • गले में सूजन आदि से पीड़ित रोगी को गले के ऊपर केले का छिलका बांधना चाहिए। इससे गले की सूजन मिटती है और टांसिल का बढ़ना भी ठीक होता है।

 

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