कार्बोहाइड्रेट्स का चयापचय


कार्बोहाइड्रेट्स का चयापचय

(Metabolism of Carbohydrates)


         भोजन में स्टार्च और शर्करा के रूप में ग्रहण किए जाने वाले कार्बोहाइड्रेट्स पर पाचक नली (digestive tract) में लार (saliva), अग्न्याशयिक रस तथा आंत्रीय रस में मौजूद एंजाइम्स (पाचक रस) क्रिया करके उन्हें मोनोसैकेराइड्स, मुख्य रूप से ग्लूकोज में बदल देते हैं। ग्लूकोज छोटी आंत के अंकुरों (villi) द्वारा अवशोषित होकर उनके भीतर मौजूद रक्त कोशिकाओं के रक्त में पहुंच जाता है। यहां से यह पोर्टल शिरा (portal vein) के द्वारा जिगर में चला जाता है और जिगर में होने वाली अनेकों चयापचयी क्रियाओं में काम आ जाता है। बाकी ग्लूकोज अग्न्याश्य (पैंक्रियाज0 से स्रावित होने वाले इंसुलिन नामक हॉर्मोंन के द्वारा ग्लाइकोजन में बदल जाता है और जमा रहता है। जिगर से कुछ ग्लूकोज रक्त परिसंचरण द्वारा कंकालीय पेशियों (skeletal muscles) में पहुंचकर उनमें ग्लाइकोजन के रूप में जमा हो जाता है। ग्लूकोज की अधिक मात्रा, जो जिगर अथवा पेशियों में जमा नहीं हो पाती है, वह अक्सर संतृप्त वसा (saturated fat) में बदल जाती है तथा वसीय ऊतकों (adipose tissues) में जमा हो जाती है।

     जब शरीर की कोशिकाओं को ऊर्जा के लिए अतिरिक्त ग्लूकोज की जरूरत पड़ती है तो जिगर में जमा ग्लाइकोजन एपिनेफ्रीन (epinephrine) और ग्लूकैगॉन (glucagon) हॉर्मोंस के प्रभाव से दुबारा ग्लूकोज में बदल जाता है तथा रक्त में मुक्त होकर रक्तप्रवाह के द्वारा शरीर की सारी कोशिकाओं में पहुंच जाता है।

     शरीर की कोशिकाओं में मौजूद ग्लूकोज का ऑक्सीकरण होने से शारीरिक क्रियाओं के लिए जरूरी ऊर्जा (शक्ति) तथा शरीर को गर्म रखने के लिए जरूरी ऊष्मा पैदा होती है और बेकार पदार्थ के रूप में कार्बन डाइऑक्साइड और जल का निर्माण होता है, जो शरीर से उत्सर्जित (बाहर निकल) हो जाते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड फेफड़ों द्वारा सांस के साथ शरीर से बाहर निकल जाती है और जल गुर्दों द्वारा मूत्र के रूप में तथा त्वचा द्वारा पसीने के रूप में बाहर निकल जाता है। ग्लूकोज के पूर्ण ऑक्सीकरण के लिए ऑक्सीजन की पूरी आपूर्ति होना जरूरी है। ऑक्सीजन कम मात्रा में उपलब्ध होने पर ग्लूकोज का ऑक्सीकरण पूर्ण नहीं हो पाता है, जिससे शारीरिक क्रियाओं के लिए पर्याप्त ऊर्जा उपलब्ध नहीं हो पाती है तथा ग्लूकोज लैक्टिक एसिड में बदल जाता है, जिसके कारण तेज ऐंठन (acute cramp) का दर्द शुरू हो जाता है। यह ऐंठन ज्यादा व्यायाम करने या दौड़ने-भागने के कारण पेशियों या हृदय की भित्तियों में हो सकती है। ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा मिलने (वातनिरपेक्षी श्वसन- (Anaerobic respiration) पर लैक्टिक एसिड का लगभग 1/5 भाग कोशिकाओं में कार्बन डाइऑक्साइड और जल में ऑक्सीकृत हो जाता है तथा बाकी 4/5 भाग ग्लाइकोजन में बदल जाता है, जो पेशियों द्वारा जरूरत के समय उपयोग में लिया जाता है।