कामसूत्र की जानकारी

Vatsyaayan ne sway kaha hai ki kaamsutra aur 64 kalaon ki shiksha prapt karane ke bad hi apni kushalata aur shram ke dwara dhan kamayen.


कामसूत्र के बारे में साधारण जानकारी

कामसूत्र कैटेगरीज :

कामसूत्र तथा उसकी अंगभूत विद्याएं ही विद्या प्राप्त करने का मुख्य अर्थ हैं। आचार्य़ वात्स्यायन के अनुसार अपहरण बलात्कार द्वारा स्त्री को प्राप्त करने की कोशिश अव्यवहारिक तथा असामाजिक है। ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए कामशास्त्र तथा 64 कलाओं का अध्ययन करने के बाद ही ग्रहस्थ आश्रम में प्रवेश करना चाहिए................................
 मुनि वात्स्यायन ने इस श्लोक में "विद्या" शब्द का उपयोग किया है। धर्मविद्या और उसकी अंगभूत विद्याओं को पढ़ने के साथ कामशास्त्र तथा उसकी अंगभूत विद्याओं को पढ़ने की सलाह दी गयी है। यह चौदह विद्याओं तथा सात सिद्धांतों पर आधारित है। इन्ही चौदह विद्याओं के विभिन्न प्रकार बाद में विभिन्न शास्त्रों तथा सिद्धांतों के रूप में प्रचलित हुए..............................
मनुष्य की उम्र 100 साल की निर्धारित की गई है। अपने इस पूरे जीवन को सुखी और सही रूप से चलाने के लिए ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यास नाम के चार भागों में बांटकर धर्म, अर्थ और काम का साधन, संपादन इस प्रकार से करना चाहिए कि धर्म,अर्थ, काम में आपस में विरोध का आभास न हो तथा वे एक-दूसरे के पूरक बनकर मोक्षप्राप्ति के साधन बन सकें................................
भारतीय सभ्यता, संस्कृति और साहित्य का यह बहुत पुराना चलन रहा है कि ग्रंथ की शुरुआत, बीच और अंत में मंगलाचरण किया जाता है। इसके बाद आचार्य वात्सायन ने ग्रंथ की शुरुआत करते हुए अर्थ, धर्म और काम की वंदना की है। दिए गए पहले सूत्र में किसी देवी या देवता की वंदना मंगलाचरण द्वारा न करके, ग्रंथ में प्रतिपाद्य विषय- धर्म, अर्थ और काम की वंदना को महत्व दिया है................................
अपनी से ऊंची जाति या पराई स्त्री से संभोग की इच्छा शास्त्रों के अनुकूल नहीं है। इसी तरह से अपने से नीची जाति की स्त्रियों सें संभोग की इच्छा रखना गलत है। परंतु वेश्याओं तथा पुनर्भु स्त्रियों से संभोग करना सहीं है क्योंकि उनके साथ जो संभोग क्रिया की जाती है वह सिर्फ शरीर की आग को शांत करने के लिए होती है न कि संतान आदि पैदा करने के लिए................................