कन्यासम्प्रयुक्तक

Jyadatar doston ki yahi pravriti hoti hai ki we apne dost ki kulinta, uske paurush, shil adi ki tariph karate hai aur ladaki ke ghar walon se uske kary aur gunon ke bare men batate hai.


कन्यासम्प्रयुक्तक


कामसूत्र कैटेगरीज :

कन्या की शादी का विधान बताते हुए वात्स्यायन कहते हैं- कि जो युवक अपनी ही जाति की युवती के साथ शास्त्रों के नियम के अनुसार विवाह करता है, उसे बिना किसी कष्ट के धर्म, धन और पुत्र की प्राप्ति होती है। ऐसे पुरुष को पत्नी से बेहद प्यार मिलता है..............................
युवक-युवती की शादी हो जाने के बाद पति-पत्नी को शादी के तीन रात तक जमीन पर साधारण विस्तर पर सोना चाहिए और पति-पत्नी दोनों को ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना चाहिए। भोजन में रसयुक्त पदार्थ तथा नमकीन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए.............................
कामसूत्र में बताया गया है कि शास्त्रों के अनुसार चार प्रकार से शादी की जा सकती है और इनमें से किसी भी विधि से शादी कर लेनी चाहिए। जब लड़की शादी करके ससुराल जाती है तो उसे विश्वस्त तथा आश्वस्त बनाने के लिए प्रेम भरे शब्दों का सहारा लेना चाहिए................................
वात्स्यायन ने आलिंगन करने के चार प्रकार बताये हैं- स्पृष्टक, विद्धक, उदृष्टक तथा पीड़ितक। प्रेमिका का हाथ पकड़ने के बाद यदि वह प्रेमी के मनोभावों को समझ जाए तो प्रेमी को चाहिए कि इन चार प्रकार के आलिंगनों में से जो सही लगे उसी रूप में प्रेमिका को आलिंगन करें..............................
सहेली को प्रेमिका को यह भी बताना चाहिए कि उसके माता-पिता नासमझी और लालच की वजह से तुम्हारी शादी किसी अमीर लड़के के साथ कर देगा, फिर तुम क्या करोगी जबकि वह लड़का तुमसे प्यार करता है और तुम्हें खुश रखेगा...............................