मलरोग

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Mal se sambandhit rogon ka upchar ayurveda se asanipurawak kiya ja sakata aur ye rog is prakar hai jaise Atisar, Pechish, Pakwatisar, Parvatiy atisar, Malbandh aadi.

मलरोग


अतिसार     : जब शरीर में मौजूद धातुएं कुपित होकर जठराग्नि को मन्द बनाकर खुद मल में घुल जाती है, तब अपानवायु उन्हें नीचे की ओर धकेलती है, जिसके कारण वे गुदा मार्ग से वेग की भांति निकलती हैं तो इसे अतिसार या दस्त का आना कहते हैं......................>> Read More


अमीबिक प्रवाहिक (आमातिसार)   : अमीबिका प्रवाहिका रोग से पीड़ित रोगी में इस प्रकार के लक्षण पाए जाते हैं जैसे- मल में आंव आना, अमीबा जीवाणु और मवाद आना आदि......................>> Read More


मल का वेग रोकने से रोग    : अगस्त के 20 ग्राम पत्तों को 400 मिलीलीटर पानी में उबालें जब पानी 100 मिलीलीटर शेष जाए तब इसमें से लगभग 15 मिलीलीटर काढ़ा पीने से पेट के कई प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं......................>> Read More


मल-मूत्र शुद्ध करने के लिए   : लगभग आधा ग्राम यव का रस तथा नींबू के रस को गर्म पानी में मिलाकर भोजन के बाद दोनों समय लेने से रोगी को लाभ मिलता है......................>> Read More


पेचिश (आंवरक्त)   : पेचिश या आंवरक्त खानपान की गड़बड़ी और एण्टामिवा हिस्टोलिटिका जीवाणु के कारण उत्पन्न होता है। इस रोग में मल के साथ आंवयुक्त खून आता है और पेट के नीचे तेज दर्द होता है......................>> Read More


पक्वातिसार   : बेल पत्थर के 3 से 6 ग्राम गूदे को लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग छाछ (लस्सी) में मिलाकर दिन में 3 से 4 बार पीने से लाभ मिलता है......................>> Read More


पर्वतीय अतिसार   : पर्वतीय स्थानों की यात्रा करते समय सैलानियों अर्थात वहां घूमने के लिये जाने वाले लोगों को अधिकतर यह रोग हो जाता है......................>> Read More


मलबंध (उदावर्त्त)    :  जिस रोग में गुदा की गैस या वायु पेट के ऊपर की ओर चली जाती है, उसे उदावर्त्त या मलबंध कहते हैं। भोजन खाने के बाद नहीं पचता है तो उससे जी मिचलाना, हृदय (दिल) और पेट में व्याकुलता......................>> Read More