पित्त विकार

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Pitta se sambandhit rogon ka upchar ayurveda se asanipurawak kiya ja sakata aur ye rog is prakar hai jaise Pitta Jwar, Pitta ki vridhdi, shitpitt, Pitt ki pathari aadi.

पित्त विकार


पित्त ज्वर      :  नमकीन, खट्टे, गरम, तीखे और गरिष्ठ पदार्थों को ज्यादा खाने से या ज्यादा खाना, ज्यादा मेहनत, तेज धूप या आग के सामने बैठना और ज्यादा क्रोध यानी गुस्सा करने से भी इसका बुखार हो सकता है.......................>> Read More


पित्त की वृद्धि    :  पित्त की वृद्धि से कब्ज, सिर दर्द, भूख न लगना, सुस्ती आदि के लक्षण होते हैं। इससे शरीर के अन्दर और बाहर दोनों जगह जलन होती है.......................>> Read More


शीतपित्त   :  खून की गर्मी या पित्त के ज्यादा होने से कभी-कभी त्वचा पर लाल-लाल चकत्ते या ददोड़े से निकल आते है जिनमें खुजली होती है। इसे पित्ती उछलना कहते है.......................>> Read More


पित्त की पथरी    :  पित्ताशय (वह स्थान जहां पेशाब एकत्रित होता हैं) में कोई पदार्थ जब जमकर पथरी का रूप धारण कर लेती है तो उसे ही पित्त की पथरी कहते हैं.......................>> Read More