नाड़ी के रोग

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Nadi se sambandhit rogon ka upchar ayurveda se asanipurawak kiya ja sakata aur ye rog is prakar hai jaise Nadi ka chhootana, Nadi ka dard, Nadi ka ghav, Nadi men jalan, Pairon ki nase Phool jana aadi.

नाड़ी के रोग


नाड़ी का छूटना     :  नाड़ी के छूटने से हृदय की क्रिया कमजोर पड़ जाती है। नाड़ी छूट जाने से शरीर से तरल पदार्थ अधिक मात्रा में निकल जाता जिसके कारण शरीर में खून का बहाव (रक्त संचार) कमजोर पड़ने लगता है....................>> Read More


नाड़ी का दर्द   : शरीर के विशेष अंग (भाग) में स्नायविक दर्द से स्नायुशूल यानी नाड़ी का दर्द उत्पन्न होता है। यह अंगों के अनुसार कई तरह के होते हैं जैसे चेहरे का स्नायुशूल, अधकपारी, पार्श्वशूल....................>> Read More


नाड़ी का घाव   :  नाड़ी में फोड़े या घाव होने से घाव में मवाद, चमड़ा, शिरा, स्नायु, हड्डी आदि जगहों से होकर मांस में भीतर ही भीतर अधिक दूर तक यह मवाद (पीव) प्रवेश कर जाती है। जो शरीर के अंदर राध नाड़ी में बने छोटे छेद के द्वारा बाहर आती रहती है....................>> Read More


नाड़ी में जलन   : नाड़ी तंत्र हमारे शरीर में जाल की तरह फैली हुई है। इनमें से किसी भी अंगों के मुख्य नाड़ी या उसके आस-पास फैली नाड़ी की स्नायु में जलन उत्पन्न कर नाड़ी में सूजन पैदा कर देती है....................>> Read More


पैरों की नसें फूल जाना   : पैरों की नसे फूल जाने पर रोगी को एक चम्मच शीरा गुडका को एक कप पानी में मिलाकर दिन में 3 बार खुराक के रूप में  पीने से नसों का फूलना ठीक हो जाता है....................>> Read More


शिरास्फिति    :  जब हाथ की नसे (शिराएं) फूल जाती हैं तो इसमें दर्द उत्पन्न होता है। यह शिराओं में अवरोध होने से होता है। इसको शिरो, ब्रह्म, सुषुम्ना नाड़ी, चक्रवात वाहिनी, स्नायु वात बस्ती और वात कुंडलिका आदि नामों से जाना जाता है....................>> Read More