कंपवात

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Kampvat se sambandhit rogon ka upchar ayurveda se asanipurawak kiya ja sakata aur ye rog is prakar hai jaise Aakshep, Ang-pratyang, Anguliyon ka kampan, Kampvat aadi.

कंपवात


आक्षेप (पेशी-स्फुरण के साथ बेहोशी और ऐंठन)     : जब मनुष्य अपनी स्मरण या पहचानने की शक्ति खोकर अचानक गिर जाता है, मांसपेशियों में ऐंठन या अकड़न आ जाये और हाथ-पैरों को कड़ा कर दें यह समझ लेना चाहिए कि उस व्यक्ति को आक्षेप रोग हो गया है...................>> Read More


अंग-प्रत्यंग   : नाड़ियों की कार्य क्षमता कम हो जाने से, हाथ-पैरों में आक्षेप (सुन्नता) आने लगता है। रोगी किसी वस्तु को हाथ से नहीं उठा सकता है अगर रोगी किसी वस्तु को उठाता है तो रोगी के हाथ में झिनझिनी भरने लगती है...................>> Read More


अंगुलियों का कांपना  : हाथ-पैरों की अंगुलियों का कांपना, अंगुलियों का कम्पवात कहलाता है। रोगी के न चाहने पर अंगुलियां कांपती रहती हैं। हाथ से ग्लास, चम्मच आदि कोई भी वस्तु रोगी नहीं पकड़ पाता है। चलते फिरते समय भी अंगुलियां कांपती हैं...................>> Read More


कम्पवात (नर्तन रोग)   :  शरीर के किसी अंग का या पूरे शरीर के नियंत्रण खो जाने से कम्पन होता  रहता है। यह एक तरह का वात ही है। इसलिए इसे कम्पवात कहते हैं...................>> Read More