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आमाशय पर दबाव


आमाशय पर दबाव

Compression on the stomach


चिकित्सक के द्वारा इलाज :

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार आमाशय से सम्बन्धित यदि कोई रोग किसी व्यक्ति को हो जाता है तो उस व्यक्ति के रोग को ठीक करने के लिए पेट के आमाशय पर बिन्दु होता हैपरिचय-

          आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार आमाशय से सम्बन्धित यदि कोई रोग किसी व्यक्ति को हो जाता है तो उस व्यक्ति के रोग को ठीक करने के लिए पेट के आमाशय पर बिन्दु होता है और इन बिन्दुओं पर दबाव देने से रोग ठीक हो जाते हैं। वैसे इस क्षेत्र पर दबाव बैठी या लेटी हुई अवस्था में देना चाहिए।

आमाशय क्षेत्र पर दबाव देने के लिए निम्नलिखित भाग होते हैं जो इस प्रकार हैं-

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार अधिजठर कोटर में डायाफ्राम पर इस धारावाही की पहली बिन्दु होती है हथेली से आमाशय के क्षेत्र पर धारावाही दबाव-

          आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार अधिजठर कोटर में डायाफ्राम पर इस धारावाही की पहली बिन्दु होती है और दो से नौ बिन्दु नीचे योन क्षेत्र (योनि के आस-पास का भाग) तक फैले रहते हैं। फिर आमाशय की दाहिनी तरफ जाते हैं तथा इसके बाद आमाशय के बाईं तरफ नीचे की ओर आते हैं।  जब इन बिन्दुओं पर दबाव देना हो तो दोनों हाथों के हथेलियों का उपयोग करना चाहिए। अब दाईं हथेली पर बाईं हथेली को रखते है। इन बिन्दुओं पर दबाव कम से कम तीन सेकेण्ड के लिए देना चाहिए। पहला बिन्दु आमाशय पर होता है तथा दूसरा बिन्दु छोटी आंत पर, तीसरा बिन्दु मूत्राशय पर, चौथा बिन्दु आंधात्र पर, पांचवा बिन्दु यकृत पर, छठा बिन्दु प्लीहा पर, सातवां बिन्दु आंत पर, आठवां बिन्दु अवग्राही पर तथा नौवां बिन्दु मलाशय पर होता हैं। इन बिन्दुओं पर दबाव देते समय पहले गहरी सांस लेनी चाहिए और फिर दबाव को धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए ताकि दबाव का गहरा प्रभाव पड़े। जब दबाव देना बंद करते है तब सांस को छोड़ना चाहिए। इस तरह से दबाव देने के बाद जब आमाशय का कड़ापन खत्म हो जाए तो दोनों हाथ की तर्जनी, मध्यम तथा अनामिका उंगलियों की नोक को मिला कर इन बिन्दुओं पर दबाव देना चाहिए। इन बिन्दुओं पर प्रतिदिन दबाव देने से कई प्रकार के रोग जल्दी ही ठीक हो जाते हैं।

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार इस क्षेत्र की उपचार बिन्दु नाभि के चारों तरफ होता है। इस क्षेत्र का पहला बिन्दु दाहिनी और तिरछे रूप में नाभि के ऊपर तथा शेष घड़ी की गति के अनुसार वृत्त में रहते हैं। छोटी आंत का क्षेत्र-

           आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार इस क्षेत्र की उपचार बिन्दु नाभि के चारों तरफ होता है। इस क्षेत्र का पहला बिन्दु दाहिनी और तिरछे रूप में नाभि के ऊपर तथा शेष घड़ी की गति के अनुसार वृत्त में रहते हैं। इन बिन्दुओं पर दबाव देने के लिए तर्जनी, मध्यम तथा अनामिका उंगलियों के सिरों का उपयोग करना चाहिए तथा इन बिन्दुओं पर दबाव कम से कम तीन सेकेण्ड के लिए देना चाहिए और फिर इस उपचार को तीन बार दोहराना भी चाहिए। इन बिन्दुओं पर दबाव प्रतिदिन देने से कई प्रकार के रोग जल्दी ही ठीक हो जाता हैं।

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार अपने दाएं हाथ की उंगलियों को सटाकर हथेली को नाभि के ऊपर रखें। इसके बाद बाईं हथेली को दाहिनी हथेली के ऊपर उल्टी दिशा में रखें। छोटी-बड़ी आतों का क्षेत्र-

        इसके बाद इस क्रिया को 10 बार दोहराना चाहिए। फिर हथेलियों को उसी स्थिति में छोड़कर उन्हें दुबारा से दबाएं ताकि वे फिसले नहीं तथा गोल घुमावदार दबाव 10 बार इस बिन्दु पर देना चाहिए।आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार अपने दाएं हाथ की उंगलियों को सटाकर हथेली को नाभि के ऊपर रखें। इसके बाद बाईं हथेली को दाहिनी हथेली के ऊपर उल्टी दिशा में रखें। फिर इसके बाद पहले दाएं हाथ के उभरे भागों से बड़ी आंत को नाभि की ओर खीचें और जब आप उस बिन्दु के भाग को खींच चुके हो तो उसे छोड़ दें तथा फिर कलाई के जोड़ को आंत की नाभि की दिशा की ओर धकेलें। इसके बाद इस क्रिया को 10 बार दोहराना चाहिए। फिर हथेलियों को उसी स्थिति में छोड़कर उन्हें दुबारा से दबाएं ताकि वे फिसले नहीं तथा गोल घुमावदार दबाव 10 बार इस बिन्दु पर देना चाहिए। इसके बाद इन बिन्दुओं पर कंपायमान (हाथ को कंपकंपाते हुए दबाव देना) दबाव 10 सेकेण्ड के लिए देना चाहिए। इस प्रकार से रोगी व्यक्ति यदि प्रतिदिन उपचार करता है तो उसका रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

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