अरीठा


अरीठा


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परिचय :

         अरीठे के वृक्ष भारतवर्ष में अधिकतर सभी जगह होते हैं। यह वृक्ष बहुत बड़ा होता है, इसके पत्ते गूलर से भी बड़े होते हैं। अरीठे के वृक्ष को साधारण समझना केवल भ्रम है। अरीठे को पीसकर सिर में डाल लेने से साबुन की आवश्यकता ही नहीं रहती है।

विभिन्न रोगों में उपयोगी :

1. सांप, सोमल तथा अफीम के विष पर : अरीठा विषनाशक पदार्थ होता है। यदि सांप काट ले, तो अरीठे का पानी आंख में लगाने से विष उतर जाता है। यदि विष बहुत चढ़ गया हो तो अरीठे का पानी पिलाना चाहिए, इससे उल्टी होकर जहर जल्दी उतर जाता है। यह दवा अफीम, सोमल आदि सब चीजों के जहर दूर कर देती है। इसे आंख में काजल के समान लगाने के बाद अरीठे के पत्तों का रस भी शरीर पर मलना चाहिए। जहर उतर जाने पर आंखों में जलन होने लगती है और आंखें सुर्ख हो जाती हैं। आंखों में ठंडक लाने और सुर्खी को भगाने के लिए 2-4 दिन तक मक्खन अथवा ताजे घी को आंखों में आंजना (काजल के समान लगाना) चाहिए। किसी भी रोग को दूर करने के लिए यदि अरीठा आंख में आंजना पड़े, तो तुरन्त घी या मक्खन अवश्य लगा देना चाहिए, नहीं तो जलन होने लगती है।

2. बिच्छू के विष पर : एक अरीठे के छिलके के चूर्ण को गुड़ में मिलाकर उसकी 3 गोलियां बनाएं। उनमें से 1 गोली खाकर थोड़ा ठंडा जल पियें, थोड़ी देर बाद दूसरी गोली खाकर गर्म पानी पिएं। इसके बाद थोड़ी देर में तीसरी गोली खाएं और ऊपर से ठंडा जल पी लें। इस औषधि से विष शीघ्र उतर जाता है। यदि किसी को तम्बाकू पीने की आदत हो, तो तम्बाकू की जगह अरीठा चिलम में रखकर धूम्रपान करें। इससे भी बिच्छू का जहर उतर जाता है।

3. छाती में कफ जमा होना :

  • अरीठे की छाल के बारीक चूर्ण को सेवन करने से कफ पतला होकर तुरन्त निकल जाता है।
  • अरीठे का पानी पिलाना चाहिए और इसका फेन पेट पर मलना चाहिए।

4. सिर में दर्द : लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग अरीठे की गिरी सुंघाने से तेज सिर का दर्द भी ठीक हो जाता है।

5. मस्तिष्क के रोग : अरीठे के पत्तों के रस में कालीमिर्च को घिसकर नाक में डालना चाहिए। इससे सिर में दर्द, आधे सिर में दर्द यानी माइग्रेन आदि सभी प्रकार के मस्तिष्क रोग नष्ट हो जाते हैं।

6. प्रसूता स्त्रियों या गर्भवती स्त्रियों के विभिन्न विकार : गर्भवती महिला या जिसकी डिलीवरी हो चुकी हो उसका सिर भारी होकर घूमने लगता है, आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है और दांत चिपक जाते हैं, उसे समझ लेना चाहिए कि उसे अनन्तवात या नन्दवायु-रोग हो गया है। उसकी आंख में अरीठे के फेन का अंजन करना चाहिए और 2-3 दिन तक घी अथवा मक्खन आंखों में लगाना चाहिए।

7. गर्मी से उत्पन्न रोग : अरीठे का फेन दिन में 2-3 बार लगाकर मलना चाहिए। इसके बाद गर्म पानी से धो लेना चाहिए।

8. दस्त और उल्टी बंद करने के लिए : अरीठे को मसलने से जो फेन निकले, उसे पेट तथा पैरों पर मलें और उसका सेवन करें। इससे दस्त के साथ-साथ उल्टी होना बंद हो जाती है।

9. धूप में नंगे पैर घूमने से उत्पन्न हुई जलन : अरीठे के फेन को पैर पर मलने से ठंडक मिलती है।

10. नहारू (गंदा पानी पीने) पर होने वाला रोग : अरीठे के बीजों की गिरी  को हींग के साथ कूटकर गर्म करके बांधना चाहिए।

11. अपस्मार (मिर्गी) :

  • अरीठे को पीस-छानकर रख लें, इसे रोजाना सूंघने से मिरगी का रोग खत्म हो जाता है।
  • अरीठे की बीज रोगी के मुंह में रख देने से मिरगी के कारण होने वाली बेहोशी दूर हो जाती है।
  • अरीठे के चूर्ण को कपड़े से छानकर मिरगी के रोगी को सुंघाने से मिरगी रोग खत्म हो जाता है।
  • नींबू के रस में अरीठे को घिसकर उसको नाक में टपकाने से मिर्गी के दौरे समाप्त हो जाते हैं।

12. शरीर में रक्तगुल्म (खून की गांठे) बनने पर : अरीठे के पानी में कड़वी वृन्दावनी की जड़ को घिसकर पीने से रक्तगुल्म ठीक हो जाता है।

13. आंखों में कीचड़ : अरीठे का फेन निकालकर दोनों आंखों में अंजन करना चाहिए। इससे लाभ होता दिखलाई दे तो 3 दिन तक आंखों में मक्खन लगाना चाहिए।

14. गाय-भैंसों को सांप द्वारा काट खाने पर : यदि गाय अथवा अन्य पालतू पशुओं को सांप काट ले तो अरीठे के फेन का अंजन (आंखों में लगाना) करना चाहिए और लगभग 500 ग्राम से 900 ग्राम तक अरीठे का पानी पिलाना चाहिए।

15. बच्चों के पेट के कीड़े : अरीठे की छाल को बारीक पीस लें, फिर इसे गुड़ में मिलाकर लगभग 1 ग्राम का चौथाई भाग आकार की गोली बना लें। इसकी एक-एक गोली बच्चे को देने से उसके पेट के कीड़े मर जाते हैं।

16. पेट में दर्द :

  • अरीठे और करंजवे (कटुकरंजा) के बीज का चूर्ण बराबर-बराबर लेकर उसमें आधा हिस्सा हींग और संचल डालकर अदरक के रस में चने के बराबर गोली बनाएं और दिन में 3 बार 2-2 गोली गर्म पानी के साथ दें। 1 सप्ताह में पेट का तेज से तेज दर्द भी ठीक होता है।
  • अरीठे की छाल और समुद्रफेन को खाने से पेट की बीमारियां मिट जाती हैं।

17. फिट (दौरा) के कारण आयी हुई बेहोशी पर : लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग आधा ग्राम तक अरीठे को पानी में मसलकर उस पानी को नाक में डालना चाहिए। पानी नाक में जाते ही रोगी सचेत हो जाता है। प्रत्येक दौरे के समय ऐसा करने से सदैव के लिए दौरे की बीमारी दूर भी होती है अथवा अरीठे की धूनी देनी चाहिए।

18. हिस्टीरिया : हिस्टीरिया से पीड़ित स्त्री को अरीठे की धूनी देनी चाहिए। यदि मासिक-स्राव साफ न आता हो, तब तो अरीठे के समान दूसरी औषधि नहीं है।

19. अनियमित मासिक-स्राव : 3-4 अरीठों का पानी रोज एक बार सोते समय पीना चाहिए। इससे मासिक खुलकर नियमित समय पर आने लगता है।

20. प्रसूति (बच्चे की डिलीवरी) के समय गर्भ बाहर निकलने पर : अरीठे की छाल कूटकर बत्ती बनाकर योनि में रखने से बच्चा शीघ्र बाहर आ जाता है।

21. मासिक-धर्म की अनियमितता और पेट आदि के दर्द पर : अरीठे की छाल कूटकर बत्ती बनाकर योनि में रखने से मासिक-धर्म की अनियमितता दूर होती है तथा इसके साथ-साथ पेट के दर्द में आराम मिलता है।

22. सभी प्रकार के जहर : किसी भी प्रकार का विष या जहर का असर शरीर में हो तो अरीठे का पानी आंख और नाक में डालना चाहिए।

23. सख्त बुखार में दिमाग को शीतल करने : अरीठे के पानी की पट्टी सिर पर रखने से कोई तकलीफ नहीं होती और ज्वर उतरने में सहायता मिलती है।

24. दमा : अरीठा की मींगी या आम की गुठली की गिरी को खाने से श्वास रोग दूर हो जाता है।

25. मासिक-धर्म में दर्द : लगभग 3-4 अरीठों का पानी प्रतिदिन गोली बनाकर खाने से कष्टप्रद मासिक-धर्म दूर हो जाता है।

26. कण्ठमाला : अरीठे का लेप करने से कंठमाला (गांठों की सूजन) सूजन मिट जाती है।