अमरूद


अमरूद

Guava, Psidium Guajava


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[ A ] से संबंधित आयुर्वेदिक औषधियां

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अजवाइन 

अकलबेर

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अरिमेद

अरीठा

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एरक

अरलू

अशोक

अश्वकिर्णक

अश्वगंधा

अतिबला (खरैटी)

अतीस

आयापान

आड़ू

आक

आकड़ा

जंगली अजवायन

अजगंधा

अजमोद

अगस्ता

आलूबुखारा

आलू

आम

आंबा हल्दी

आमलकी

आसन (विजयसार)

आल

आसन (असन)

अभ्रक

अदरक

अफीम

सामान्य परिचय-

          अमरूद में विटामिन सी और शर्करा काफी मात्रा में होती है। अमरूद में पेक्टिन की मात्रा भी बहुत अधिक होती है। अमरूद का पेड़ आमतौर पर भारत के सभी राज्यों में उगाया जाता है। उत्तर प्रदेश का इलाहाबादी अमरूद विश्वविख्यात है। यह विशेष रूप से स्वादिष्ट होता है। इसके पेड़ की ऊंचाई 10 से 20 फीट होती है। टहनियां पतली-पतली और कमजोर होती हैं। इसके तने का भाग चिकना, भूरे रंग का, पतली सफेद छाल से आच्छादित रहता है। छाल के नीचे की लकड़ी चिकनी होती है। इसके पत्ते हल्के हरे रंग के, खुरदरे, 3 से 4 इंच लंबे, आयताकार, सुगंधयुक्त और डंठल छोटे होते हैं।

          अमरूद लाल और पीलापन लिए हुए हरे रंग के होते हैं। बीज वाले  और बिना बीज वाले तथा अत्यंत मीठे और खट्टे-मीठे प्रकार के अमरूद आमतौर पर देखने को मिलते हैं। सफेद की अपेक्षा लाल रंग के अमरूद गुणकारी होते हैं। सफेद गुदे वाले अमरूद अधिक मीठे होते हैं। फल का भार आमतौर पर 30 से 450 ग्राम तक होता है।

           आमतौर पर देखा जाता है कि जब लोग फल खरीदने जाते हैं तो उनकी नज़र में केला, सेब, अंगूर तथा आम आदि फल ही पोशक तत्वों से भरपूर नज़र आते हैं। अमरूद जैसा सस्ता तथा सर्वसुलभ फल उन्हें बेकार और गरीबों के खाने योग्य ही लगता है, पर वास्तव में ऐसा नहीं है। अमरूद में सेब से भी अधिक पोशक तत्व होते हैं। इसीलिए इसे `गरीबों का सेब´ भी कहा गया है। अमरूद मधुर और रेचक (दस्त लाकर पेट साफ करने वाला) फल है तथा इसके नियमित प्रयोग से मल अवरोध तो दूर होता ही है, साथ ही वात-पित्त, उन्माद (पागलपन), मूर्छा (बेहोशी), मिर्गी, पेट के कीडे़, टायफाइड और जलन आदि का नाश होता है। आयुर्वेद में इसे शीतल, तीक्ष्ण, कसैला, अम्लीय तथा शुक्रजनक (वीर्यवर्द्धक) बताया गया है। यहां सेब और अमरूद में पाए जाने वाले पोषक तत्वों की तुलना की जा रही है जिससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अमरूद कितना अधिक पौष्टिक है।

रासायनिक संगठन :

अमरूद

सेब

तत्त्व

मात्रा

तत्त्व

मात्रा

पानी

76.1 प्रतिशत

जल

85.9

प्रोटीन

1.5 प्रतिशत

प्रोटीन

0.3

वसा

0.2 प्रतिशत

वसा

0.1

खनिज पदार्थ

7.8 प्रतिशत

खनिज पदार्थ

0.3

विटामिन-सी

लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग/100 ग्राम

विटामिन-सी

2 प्रतिशत

कार्बोहाइड्रेट

14.6 प्रतिशत

कार्बोहाइड्रेट

13.4 प्रतिशत

कैल्शियम

0.01 प्रतिशत

कैल्शियम

0.01

फास्फोरस

0.44 प्रतिशत

फास्फोरस

0.02

रेशा

6.9 प्रतिशत

रेशा

नहीं होता

विभिन्न भाषाओं में नाम :

संस्कृत        

पेरूक, अमरूफल।

हिंदी.       

अमरूद, सफरी, बिही।

मराठी         

पेरू, जाम।

गुजराती      

जामफल।

बंगाली                  

पियारा, चिचारा, गोआर्चाफल।

तेलगू          

गोइया।

अरबी          

कामसुरा।

कन्नड़         

शिवे।

अंग्रेजी         

कामन गुआवा।

लैटिन         

सिडियम गुआजावा।

गुण :

          अमरूद में विटामिन सी और शर्करा काफी मात्रा में होती है। अमरूद में पेक्टिन की मात्रा भी बहुत अधिक होती है। अमरूद को इसके बीजों के साथ खाना अत्यंत उपयोगी होता है, जिसके कारण पेट साफ रहता है। अमरूद का उपयोग चटनियां, जेली, मुरब्बा और फल से पनीर बनाने में किया जाता है।

हानिकारक प्रभाव:

          शीत प्रकृति वालों को और जिनका आमाशय कमजोर हो, उनके लिए अमरूद हानिकारक होता है। वर्षा के सीजन में अमरूद के अंदर सूक्ष्म धागे जैसे सफेद कीडे़ पैदा हो जाते हैं जिसे खाने वाले व्यक्ति को पेट दर्द, अफारा, हैजा जैसे विकार हो सकते हैं। इसके बीज सख्म होने के कारण आसानी से नहीं पचते और यदि ये एपेन्डिक्स में चले जाए, तो एपेन्डिसाइटिस रोग पैदा कर सकते हैं। अत: इनके बीजों के सेवन से बचना चाहिए। इसकी दो किस्में होती हैं:- पहला सफेद गर्भवाली और दूसरा लाल-गुलाबी गर्भवाली। सफेद किस्म अधिक मीठी होती है। कलमी अमरूद में अच्छी किस्म के अमरूद भी होते हैं। वे बहुत बड़े होते हैं और उसमें मुश्किल से 4-5 बीज निकलते हैं। बनारस (उत्तर प्रदेश) में इस प्रकार के अमरूद होते हैं।


For reading tips click below links     विभिन्न रोगों में अमरूद से उपचार:
1. शक्ति (ताकत) और वीर्य की वृद्धि के लिए :

शक्ति (ताकत) और वीर्य की वृद्धि के लिए :

    अच्छी तरह पके नरम, मीठे अमरूदों को मसलकर दूध में फेंट लें और फिर छानकर इनके बीज निकाल लें। आवश्यकतानुसार शक्कर मिलाकर सुबह नियमित रूप से 21 दिन सेवन करना धातुवर्द्धक होता है।
    2. पेट दर्द :

    पेट दर्द :

      • नमक के साथ पके अमरूद खाने से आराम मिलता है।
      • अमरूद के पेड़ के कोमल 50 ग्राम पत्तों को पीसकर पानी में मिलाकर छानकर पीने से लाभ होगा।
      • अमरूद के पेड़ की पत्तियों को बारीक पीसकर काले नमक के साथ चाटने से लाभ होता है।
      • अमरूद के फल की फुगनी (अमरूद के फल के नीचे वाले छोटे पत्ते) में थोड़ा-सी मात्रा में सेंधानमक को मिलाकर गुनगुने पानी के साथ पीने से पेट में दर्द समाप्त होता है।
      • यदि पेट दर्द की शिकायत हो तो अमरूद की कोमल पित्तयों को पीसकर पानी में मिलाकर पीने से आराम होता है। अपच, अग्निमान्द्य और अफारा के लिए अमरूद बहुत ही उत्तम औषधि है। इन रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को 250 ग्राम अमरूद भोजन करने के बाद खाना चाहिए। जिन लोगों को कब्ज न हो तो उन्हें खाना खाने से पहले खाना चाहिए।
      3. बवासीर (पाइल्स) :

      बवासीर (पाइल्स) :

        • सुबह खाली पेट 200-300 ग्राम अमरूद नियमित रूप से सेवन करने से बवासीर में लाभ मिलता है।
        • पके अमरुद खाने से पेट का कब्ज खत्म होता है, जिससे बवासीर रोग दूर हो जाता है।
        • कुछ दिनों तक रोजाना सुबह खाली पेट 250 ग्राम अमरूद खाने से बवासीर ठीक हो जाती है। बवासीर को दूर करने के लिए सुबह खाली पेट अमरूद खाना उत्तम है। मल-त्याग करते समय बांयें पैर पर जोर देकर बैठें। इस प्रयोग से बवासीर नहीं होती है और मल साफ आता है।
        4. सूखी खांसी :

        सूखी खांसी :

          • गर्म रेत में अमरूद को भूनकर खाने से सूखी, कफयुक्त और काली खांसी में आराम मिलता है। यह प्रयोग दिन में तीन बार करें।
          • एक बड़ा अमरूद लेकर उसके गूदे को निकालकर अमरूद के अंदर थोड़ी-सी जगह बनाकर अमरूद में पिसी हुई अजवायन तथा पिसा हुआ कालानमक 6-6 ग्राम की मात्रा में भर देते हैं। इसके बाद अमरूद में कपड़ा भरकर ऊपर से मिट्टी चढ़ाकर तेज गर्म उपले की राख में भूने, अमरूद के भुन जाने पर मिट्टी और कपड़ा हटाकर अमरूद पीसकर छान लेते हैं। इसे आधा-आधा ग्राम शहद में मिलाकर सुबह-शाम मिलाकर चाटने से सूखी खांसी में लाभ होता है।
          5. दांतों का दर्द :

          दांतों का दर्द :

            • अमरूद की कोमल पत्तियों को चबाने से दांतों की पीड़ा (दर्द) नष्ट हो जाती है।
            • अमरूद के पत्तों को दांतों से चबाने से आराम मिलेगा।
            • अमरूद के पत्तों को जल में उबाल लें। इसे जल में फिटकरी घोलकर कुल्ले करने से दांतों की पीड़ा (दर्द) नष्ट हो जाती है।
            • अमरूद के पत्तों को चबाने से दांतों की पीड़ा दूर होती है। मसूढ़ों में दर्द, सूजन और आंतों में दर्द होने पर अमरूद के पत्तों को उबालकर गुनगुने पानी से कुल्ले करें।
            6. आधाशीशी (आधे सिर का दर्द) :

            आधाशीशी (आधे सिर का दर्द) :

              • आधे सिर के दर्द में कच्चे अमरूद को सुबह पीसकर लेप बनाएं और उसे मस्तक पर लगाएं।
              • सूर्योदय के पूर्व ही सवेरे हरे कच्चे अमरूद को पत्थर पर घिसकर जहां दर्द होता है, वहां खूब अच्छी तरह लेप कर देने से सिर दर्द नहीं उठने पाता, अगर दर्द शुरू हो गया हो तो शांत हो जाता है। यह प्रयोग दिन में 3-4 बार करना चाहिए।
              7. जुकाम :

              जुकाम :

                • रुके हुए जुकाम को दूर करने के लिए बीज निकला हुआ अमरूद खाएं और ऊपर से नाक बंदकर 1 गिलास पानी पी लें। जब 2-3 दिन के प्रयोग से स्राव (बहाव) बढ़ जाए, तो उसे रोकने के लिए 50-100 ग्राम गुड़ खा लें। ध्यान रहे- कि बाद में पानी न पिएं।
                • सिर्फ 3 दिन तक लगातार अमरूद खाने से पुरानी सर्दी और जुकाम दूर हो जाती है।
                • लंबे समय से रुके हुए जुकाम में रोगी को एक अच्छा बड़ा अमरूद के अंदर से बीजों को निकालकर रोगी को खिला दें और ऊपर से ताजा पानी नाक बंद करके पीने को दें। 2-3 दिन में ही रुका हुआ जुकाम बहार साफ हो जायेगा। 2-3 दिन बाद अगर नाक का बहना रोकना हो तो 50 ग्राम गुड़ रात में बिना पानी पीयें खा लें।
                8. मलेरिया :

                मलेरिया :

                  • मलेरिया बुखार में अमरूद का सेवन लाभकारी है। नियमित सेवन से तिजारा और चौथिया ज्वर में भी आराम मिलता है।
                  • अमरूद और सेब का रस पीने से बुखार उतर जाता है।
                  • अमरूद को खाने से मलेरिया में लाभ होता है।
                  9. भांग का नशा :

                  भांग का नशा :

                    2-4 अमरूद खाने से अथवा अमरूद के पत्तों का 25 ग्राम रस पीने से भांग का नशा उतर जाता है।
                    10. मानसिक उन्माद (पागलपन) :

                    मानसिक उन्माद (पागलपन) :

                      • सुबह खाली पेट पके अमरूद चबा-चबाकर खाने से मानसिक चिंताओं का भार कम होकर धीरे-धीरे पागलपन के लक्षण दूर हो जाते हैं और शरीर की गर्मी निकल जाती है।
                      • 250 ग्राम इलाहाबादी मीठे अमरूद को रोजाना सुबह और शाम को 5 बजे नींबू, कालीमिर्च और नमक स्वाद के अनुसार अमरूद पर डालकर खा सकते हैं। इस तरह खाने से दिमाग की मांस-पेशियों को शक्ति मिलती है, गर्मी निकल जाती है, और पागलपन दूर हो जाता है। दिमागी चिंताएं अमरूद खाने से खत्म हो जाती हैं।
                      11. पेट में गड़-बड़ी होने पर :

                      पेट में गड़-बड़ी होने पर :

                        अमरूद की कोंपलों को पीसकर पिलाना चाहिए।
                        12. ठंडक के लिए :

                        ठंडक के लिए :

                          अमरूद के बीजों को पीसें और लड्डू बनाकर गुलाब जल में शक्कर के साथ पियें।
                          13. अमरूद का मुरब्बा :

                          अमरूद का मुरब्बा :

                            अच्छी किस्म के तरोताजा बड़े-बड़े अमरूद लेकर उसके छिलकों को निकालकर टुकड़े कर लें और धीमी आग पर पानी में उबालें। जब अमरूद आधे पककर नरम हो जाएं, तब नीचे उतारकर कपड़े में डालकर पानी निकाल लें। उसके बाद उससे 3 गुना शक्कर लेकर उसकी चासनी बनायें और अमरूद के टुकड़े उसमें डाल दें। फिर उसमें इलायची के दानों का चूर्ण और केसर इच्छानुसार डालकर मुरब्बा बनायें। ठंडा होने पर इस मुरब्बे को चीनी-मिट्टी के बर्तन में भरकर, उसका मुंह बंद करके थोड़े दिन तक रख छोड़े। यह मुरब्बा 20-25 ग्राम की मात्रा में रोजाना खाने से कोष्ठबद्धता (कब्जियत) दूर होती है।
                            14. आंखों के लिए :

                            आंखों के लिए :

                            आंखों के लिए :

                              अमरूद के पत्तों की पोटली बनाकर रात को सोते समय आंख पर बांधने से आंखों का दर्द ठीक हो जाता है। आंखों की लालिमा, आंख की सूजन और वेदना तुरंत मिट जाती है।
                              15. कब्ज :

                              कब्ज :

                                • 250 ग्राम अमरूद खाकर ऊपर से गर्म दूध पीने से कब्ज दूर होती है। अमरूद के कोमल पत्तों के 10 मिलीलीटर रस में थोड़ी शक्कर मिलाकर प्रतिदिन केवल एक बार सुबह सेवन करने से 7 दिन में अजीर्ण (पुरानी कब्ज) में लाभ होता है।
                                • अमरूद को नाश्ते के समय कालीमिर्च, कालानमक, अदरक के साथ खाने से अजीर्ण, गैस, अफारा (पेट फूलना) की तकलीफ दूर होकर भूख बढ़ जाएगी। नाश्ते में अमरूद का सेवन करें। सख्त कब्ज में सुबह-शाम अमरूद खाएं।
                                • अमरूद को कुछ दिनों तक नियमित सेवन करने से 3-4 दिन में ही मलशुद्धि होने लग जाती है। कोष्ठबद्धता मिटती है एवं कब्जियत के कारण होने वाला आंखों की जलन और सिर दर्द भी दूर होता है।
                                • अमरूद खाने से आंतों में तरावट आती है और कब्ज दूर हो जाता है। इसे खाना खाने से पहले ही खाना चाहिए, क्योंकि खाना खाने के बाद खाने से कब्ज करता है। कब्ज वालों को सुबह के समय नाश्ते में अमरूद लेना चाहिए। पुरानी कब्ज के रोगियों को सुबह और शाम अमरूद खाना चाहिए। इससे पेट साफ हो जाता है।
                                • अमरूद खाने से या अमरूद के साथ किशमिश के खाने से कब्ज़ की शिकायत नहीं रहती है।
                                16. कुकर खांसी, काली खांसी (हूपिंग कफ) :

                                कुकर खांसी, काली खांसी (हूपिंग कफ) :

                                  • एक अमरूद को भूभल (गर्म रेत या राख) में सेंककर खाने से कुकर खांसी में लाभ होता है। छोटे बच्चों को अमरूद पीसकर अथवा पानी में घोलकर पिलाना चाहिए। अमरूद पर नमक और कालीमिर्च लगाकर खाने से कफ निकल जाती है। 100 ग्राम अमरूद में विटामिन-सी लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग आधा ग्राम तक होता है। यह हृदय को बल देता है। अमरूद खाने से आंतों में तरावट आती है। कब्ज से ग्रस्त रोगियों को नाश्ते में अमरूद लेना चाहिए। पुरानी कब्ज के रोगियों को सुबह-शाम अमरूद खाना चाहिए। इससे दस्त साफ आएगा, अजीर्ण और गैस दूर होगी। अमरूद को सेंधानमक के साथ खाने से पाचन शक्ति बढ़ती है।
                                  • एक कच्चे अमरूद को लेकर चाकू से कुरेदकर उसका थोड़ा-सा गूदा निकाल लेते हैं। फिर इस अमरूद में पिसी हुई अजवायन तथा पिसा हुआ कालानमक 6-6 ग्राम की मात्रा में लेकर भर देते हैं। इसके बाद अमरूद पर कपड़ा लपेटकर उसमें गीली मिट्टी का लेप चढ़ाकर आग में भून लेते हैं पकने के बाद इसके ऊपर से मिट्टी और कपड़ा हटाकर अमरूद को पीस लेते हैं। इसे आधा-आधा ग्राम की मात्रा में शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम रोगी को चटाने से काली खांसी में लाभ होता है।
                                  • एक अमरूद को गर्म बालू या राख में सेंककर सुबह-शाम 2 बार खाने से काली खांसी ठीक हो जाती है।
                                  17. रक्तविकार के कारण फोड़े-फुन्सियों का होना :

                                  रक्तविकार के कारण फोड़े-फुन्सियों का होना :

                                    4 सप्ताह तक नित्य प्रति दोपहर में 250 ग्राम अमरूद खाएं। इससे पेट साफ होगा, बढ़ी हुई गर्मी दूर होगी, रक्त साफ होगा और फोड़े-फुन्सी, खाज-खुजली ठीक हो जाएगी।
                                    18. पुरानी सर्दी :

                                    पुरानी सर्दी :

                                      3 दिनों तक केवल अमरूद खाकर रहने से बहुत पुरानी सर्दी की शिकायत दूर हो जाती है।
                                      19. पुराने दस्त :

                                      पुराने दस्त :

                                        अमरूद की कोमल पत्तियां उबालकर पीने से पुराने दस्तों का रोग ठीक हो जाता है। दस्तों में आंव आती रहे, आंतों में सूजन आ जाए, घाव हो जाए तो 2-3 महीने लगातार 250 ग्राम अमरूद रोजाना खाते रहने से दस्तों में लाभ होता है। अमरूद में-टैनिक एसिड होता है, जिसका प्रधान काम घाव भरना है। इससे आंतों के घाव भरकर आंते स्वस्थ हो जाती हैं।
                                        20. कफयुक्त खांसी :

                                        कफयुक्त खांसी :

                                          एक अमरूद को आग में भूनकर खाने से कफयुक्त खांसी में लाभ होता है।
                                          21. मस्तिष्क विकार :

                                          मस्तिष्क विकार :

                                            अमरूद के पत्तों का फांट मस्तिष्क विकार, वृक्क प्रवाह और शारीरिक एवं मानसिक विकारों में प्रयोग किया जाता है।

                                            22. आक्षेपरोग :

                                            आक्षेपरोग :

                                              अमरूद के पत्तों के रस या टिंचर को बच्चों की रीढ़ की हड्डी पर मालिश करने से उनका आक्षेप का रोग दूर हो जाता है।
                                              23. हृदय :

                                              हृदय :

                                                अमरूद के फलों के बीज निकालकर बारीक-बारीक काटकर शक्कर के साथ धीमी आंच पर बनाई हुई चटनी हृदय के लिए अत्यंत हितकारी होती है तथा कब्ज को भी दूर करती है।
                                                24. हृदय की दुर्बलता :

                                                हृदय की दुर्बलता :

                                                  • अमरूद को कुचलकर उसका आधा कप रस निकाल लें। उसमें थोड़ा-सा नींबू का रस डालकर पी जाए।
                                                  • अमरूद में विटामिन-सी होता है। यह हृदय में नई शक्ति देकर शरीर में स्फूर्ति पैदा करता है। इसे दमा व खांसी वाले न खायें।
                                                  25. खांसी और कफ विकार :

                                                  खांसी और कफ विकार :

                                                    • यदि सूखी खांसी हो और कफ न निकलता हो तो, सुबह ही सुबह ताजे एक अमरूद को तोड़कर, चाकू की सहायता के बिना चबा-चबाकर खाने से खांसी 2-3 दिन में ही दम तोड़ देती है।
                                                    • अमरूद का रस भवक यन्त्र द्वारा निकालकर उसमें शहद मिलाकर पीने से भी सूखी खांसी में लाभ होता है।
                                                    • यदि बलगम खूब पड़ता हो और खांसी अधिक हो, दस्त साफ न हो हल्का बुखार भी हो तो अच्छे ताजे मीठे अमरूदों को अपनी इच्छानुसार खायें।
                                                    • यदि जुकाम की साधारण खांसी हो तो अधपके अमरूद को आग में भूनकर उसमें नमक लगाकर खाने से लाभ होता है।
                                                    26. वमन (उल्टी) :

                                                    वमन (उल्टी) :

                                                      अमरूद के पत्तों के 10 मिलीलीटर काढ़े को पिलाने से वमन या उल्टी बंद हो जाती है।
                                                      27. तृष्ण (अधिक प्यास लगना) :

                                                      तृष्ण (अधिक प्यास लगना) :

                                                        अमरूद के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर पानी में डाल दें। कुछ देर बाद इस पानी को पीने से मधुमेह (शूगर) या बहुमूत्र रोग के कारण तृष्ण में उत्तम लाभ होता है।
                                                        28. अतिसार (दस्त) :

                                                        अतिसार (दस्त) :

                                                          • बच्चे का पुराना अतिसार मिटाने के लिए इसकी 15 ग्राम जड़ को 150 मिलीलीटर पानी में ओटाकर, जब आधा पानी शेष रह जाये तो 6-6 ग्राम तक दिन में 2-3 बार पिलाना चाहिए।
                                                          • कच्चे अमरूद के फल उबालकर खिलाने से भी अतिसार मिटता है।
                                                          • अमरूद की छाल व इसके कोमल पत्तों का 20 मिलीलीटर क्वाथ पिलाने से हैजे की प्रारिम्भक अवस्था में लाभ होता है।
                                                          29. प्रवाहिका :

                                                          प्रवाहिका :

                                                            अमरूद का मुरब्बा प्रवाहिका एवं अतिसार में लाभदायक है।
                                                            30. गुदाभ्रंश (गुदा से कांच का निकलना) :

                                                            गुदाभ्रंश (गुदा से कांच का निकलना) :

                                                              • बच्चों के गुदभ्रंश रोग पर इसकी जड़ की छाल का काढ़ा गाढ़ा-गाढ़ा लेप करने से लाभ होता है।
                                                              • तीव्र अतिसार में गुदाभ्रंश होने पर अमरूद के पत्तों की पोटली बनाकर बांधने से सूजन कम हो जाती है और गुदा अंदर बैठ जाता है।
                                                              • आंतरिक प्रयोग के लिए अमरूद और नागकेशर दोनों को महीन पीसकर उड़द के समान गोलियां बनाकर देनी चाहिए।
                                                              • अमरूद के पेड़ की छाल, जड़ और पत्ते, बराबर-बराबर 250 ग्राम लेकर पीसकर रख लें तथा 1 किलो पानी में उबालें, जब आधा पानी शेष रह जायें, तब इस काढ़े से गुदा को बार-बार धोना चाहिए और उसे अंदर धकेलें। इससे गुदा अंदर चली जायेगी।
                                                              • अमरूद के पेड़ की छाल 50 ग्राम, अमरूद की जड़ 50 ग्राम और अमरूद के पत्ते 50 ग्राम को मिलाकर कूटकर 400 मिलीलीटर पानी में मिलाकर उबाल लें। आधा पानी शेष रहने पर छानकर गुदा को धोऐं। इससे गुदाभ्रंश (कांच निकलना) ठीक होता है।
                                                              • अमरूद के पत्तों को पीसकर इसके लुगदी (पेस्ट) गुदा को अंदर कर मलद्वार पर बांधने से गुदा बाहर नहीं निकलता है।
                                                              31. घुटनों के दर्द में :

                                                              घुटनों के दर्द में :

                                                                अमरूद के कोमल पत्तों को पीसकर गठिया के वेदना युक्त स्थानों पर लेप करने से लाभ होता है।
                                                                32. विषम ज्वर या मलेरिया बुखार :

                                                                विषम ज्वर या मलेरिया बुखार :

                                                                  अमरूद को खाने से इकतारा तथा चातुर्थिक ज्वर में लाभ होता है।
                                                                  33. बुखार :

                                                                  बुखार :

                                                                    अमरूद के कोमल पत्तों को पीस-छानकर पिलाने से ज्वर के उपद्रव्य दूर होते है।
                                                                    34. विदाह (पित्त की जलन) में :

                                                                    विदाह (पित्त की जलन) में :

                                                                      अमरूद के बीज निकालकर पीसकर गुलाब जल और मिसरी मिला कर पीने से अत्यंत बढ़े हुए पित्त और विदाह की शांति होती है।
                                                                      35. भांग या धतूरे का नशा :

                                                                      भांग या धतूरे का नशा :

                                                                        अमरूद के पत्तों के स्वरस को भरपेट पिलाने से या अमरूद खाने से भांग, धतूरा आदि का नशा दूर हो जाता है।
                                                                        36. पेट की गैस बनना :

                                                                        पेट की गैस बनना :

                                                                          अदरक का रस एक चम्मच, नींबू का रस का आधा चम्मच और शहद को डालकर खाने से पेट की गैस में धीरे-धीरे लाभ होता हैं।
                                                                          37. मुंह के छाले :

                                                                          मुंह के छाले :

                                                                            • रोजाना भोजन करने के बाद अमरूद का सेवन करने से छाले में आराम मिलता है।
                                                                            • अमरूद के पत्तों में कत्था मिलाकर पान की तरह चबाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।
                                                                            38. दस्त :

                                                                            दस्त :

                                                                              • अमरूद के पेड़ की कोमल नई पत्तियों को पानी में उबालकर, छानकर थोड़ी-थोड़ी-सी मात्रा में पकाकर पीने से अतिसार का आना रुक जाता है।
                                                                              • अमरूद में मिश्री डालकर या अमरूद और मिश्री का सेवन करने से दस्त का आना बंद हो जाता हैं।
                                                                              • अमरूद के पेड़ की 10 पत्तियां, नींबू की 2 पत्तियां, तुलसी की 3 पत्तियों को लेकर एक कप पानी में डालकर काढ़ा बनाकर पीने से राहत मिलती है।
                                                                              39. मुंह का रोग :

                                                                              मुंह का रोग :

                                                                                मुंह के रोग में जौ, अमरूद के पत्ते एवं बबूल के पत्ते। इस सबको जलाकर इसके धुंए को मुंह में भरने से गला ठीक होता है तथा मुंह के दाने नष्ट होते हैं।
                                                                                40. अग्निमान्द्यता (अपच) के लिए :

                                                                                अग्निमान्द्यता (अपच) के लिए :

                                                                                  अमरूद के पेड़ की 2 पत्तियों को चबाकर पानी के साथ सेवन करने से आराम होता हैं।
                                                                                  41. प्यास अधिक लगना :

                                                                                  प्यास अधिक लगना :

                                                                                    अमरूद, लीची, शहतूत व खीरा खाने से प्यास का अधिक लगना बंद हो जाता है।
                                                                                    42. मधुमेह के रोग :

                                                                                    मधुमेह के रोग :

                                                                                      पके अमरूद को आग में डालकर उसे निकाल लें, और उसका भरता बना लें, उसमें अवश्कतानुसार नमक, कालीमिर्च, जीरा, मिलाकर सेवन करें। इससे मधुमेह रोग से लाभ होता है।
                                                                                      43. योनि की जलन और खुजली :

                                                                                      योनि की जलन और खुजली :

                                                                                        अमरूद के पेड़ की जड़ को पीसकर 25 ग्राम की मात्रा में लेकर 300 मिलीलीटर पानी में डालकर पका लें, फिर इसी पानी को साफ कपड़े की मदद से योनि को साफ करने से योनि में होने वाली खुजली समाप्त हो जाती है।
                                                                                        44. गठिया रोग :

                                                                                        गठिया रोग :

                                                                                          गठिया के दर्द को सही करने के लिए अमरूद की 5-6 नई पत्तियों को पीसकर उसमें जरा-सा काला नमक डालकर प्रतिदिन सेवन करने से रोगी को लाभ मिलता है।
                                                                                          45. फोड़े-फुंसियों के लिए :

                                                                                          फोड़े-फुंसियों के लिए :

                                                                                            अमरूद की थोड़ी सी पत्तियों को लेकर पानी में उबालकर पीस लें। इस लेप को फुंसियों पर लगाने से लाभ होता है।
                                                                                            46. विसर्प-फुंसियों का दल बनना :

                                                                                            विसर्प-फुंसियों का दल बनना :

                                                                                              4 हफ्तों तक रोजाना दोपहर में 250 ग्राम अमरूद खाने से पेट साफ होता है, पेट की गर्मी दूर होती है, खून साफ होता है जिससे फुंसिया और खुजली भी दूर हो जाती है।
                                                                                                     

                                                                                               

                                                                                              Tags:  Kaamsura, Goiya, Coman guava, Shive, Piyara, Jamfal, Amrufal